खून के रिश्ते हाशिए पर, दौलत की चौखट पर सजदा: आधुनिकता की अंधी दौड़ में बिखरता परिवार और सिसकती संवेदनाएं
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पचरी घाट पर गूंजे ‘गौ माता के जयकारे’: नवनिर्मित बिलासपुर गौ सेवा धाम का दिव्य शुभारंभ, पूज्य संत गोपाल मणि जी महाराज ने बहाई गौ-महिमा की अमृत धारा
पचरी घाट पर गूंजे ‘गौ माता के जयकारे’: नवनिर्मित बिलासपुर गौ सेवा धाम का दिव्य शुभारंभ, पूज्य संत गोपाल मणि जी महाराज ने बहाई गौ-महिमा की अमृत धारा बिलासपुर: संस्कारधानी के ऐतिहासिक पचरी घाट का तट गुरुवार को गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा और गौ-सेवा के पावन संकल्पों से सराबोर हो उठा। अवसर था नवनिर्मित ‘बिलासपुर गौ सेवा धाम’ के भव्य शुभारंभ का, जहां दिव्य गौ-कथा का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में कथाव्यास पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित गौ-महिमा की अमृतमयी कथा का श्रवण करने भारी संख्या में श्रद्धालु, प्रबुद्ध नागरिक और जनप्रतिनिधि पहुंचे। संस्कृति, समृद्धि और सनातन का मूल आधार हैं गौ माता: अमर अग्रवाल समारोह में मुख्य रूप से उपस्थित पूर्व मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने दीप प्रज्वलन और गौ पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि गौ माता केवल पशुधन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की प्राणवायु और राष्ट्र की आर्थिक-धार्मिक समृद्धि की संवाहक हैं। उन्होंने कहा कि गौ सेवा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। पचरी घाट के समीप इस तरह के आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त धाम का निर्माण बिलासपुर के लिए गौरव का विषय है। संत गोपाल मणि जी ने कराया गौ-महिमा का अलौकिक बोध व्यासपीठ से पूज्य संत श्री गोपाल मणि जी महाराज ने अपने ओजस्वी और रसमयी प्रवचनों में गौ-माता के वैज्ञानिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस आंगन में गौ माता का वास होता है, वहां स्वयं ईश्वर का वास होता है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से गौ संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। महाराज श्री के श्रीमुख से गौ कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा परिसर "जय गौ माता" और "जय श्री राम" के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। सेवाभावी कार्यकर्ताओं का सम्मान व साधुवाद कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने गौ सेवा धाम के निर्माण और संचालन में दिन-रात एक करने वाले सभी सेवाभावी युवाओं और कार्यकर्ताओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वक्ताओं ने कहा कि यह धाम केवल निराश्रित और बीमार गौवंश को आश्रय ही नहीं देगा, बल्कि शहर में गौ-संरक्षण और सेवा के लिए एक प्रेरणा केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा। कार्यक्रम के समापन पर गौ माता की महाआरती की गई और उपस्थित भक्तों के बीच दिव्य महाप्रसाद का वितरण हुआ। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
नवीन प्राथमिक शाला सिरगिट्टी में जन्माष्टमी पर दिखा मथुरा-वृंदावन सा नजारा: 90 नन्हे-मुन्ने बने राधा-कृष्ण, फोटोग्राफर रोहन तावड़कर ने संजोए यादगार पल
नवीन प्राथमिक शाला सिरगिट्टी में जन्माष्टमी पर दिखा मथुरा-वृंदावन सा नजारा: 90 नन्हे-मुन्ने बने राधा-कृष्ण, फोटोग्राफर रोहन तावड़कर ने संजोए यादगार पल सिरगिट्टी: स्थानीय नवीन प्राथमिक शाला में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम और आनंदोत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर पूरी तरह कृष्ण भक्ति और बाल-सुलभ उत्साह के रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नन्हे स्कूली बच्चों की 'राधा-श्रीकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता' रही, जिसमें कक्षा पहली से पांचवीं तक के 90 बच्चों ने मनमोहक वेशभूषा धारण कर सहभागिता की। मोर मुकुट, बांसुरी और पारंपरिक परिधानों में सजे नन्हे कान्हा और राधा रानी के स्वरूप को देखकर उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। नन्हे कान्हाओं का हुआ निःशुल्क फोटो शूट कार्यक्रम के संयोजक योगेश सर के विशेष आग्रह पर शहर के प्रतिष्ठित फोटोग्राफर श्री रोहन तावड़कर अपनी पूरी टीम के साथ शाला पहुंचे। रोहन सर की टीम ने राधा-कृष्ण के रूप में सजे सभी 90 बच्चों का व्यक्तिगत रूप से अलग-अलग आकर्षक फोटो शूट किया। श्री तावड़कर ने घोषणा की कि वे सभी बच्चों को उनकी इन मनमोहक तस्वीरों की एक-एक प्रिंट प्रति निःशुल्क भेंट करेंगे, ताकि यह पल उनके बचपन की अनमोल स्मृति बनकर हमेशा साथ रहे। दो वर्षों से निरंतर दे रहे हैं निःस्वार्थ सेवा गौरतलब है कि श्री रोहन तावड़कर विगत दो वर्षों से शाला के विभिन्न आयोजनों में अपनी व्यावसायिक फोटोग्राफी सेवाएं पूरी निष्ठा और निःस्वार्थ भाव से प्रदान कर रहे हैं। विद्यालय परिवार के प्रति उनके इस विशेष योगदान और सामाजिक सरोकार के लिए शाला की शिक्षिका श्रीमती शशि सिंह ने उनका श्रीफल भेंटकर भावभीना स्वागत किया तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका आभार व्यक्त किया। बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान आयोजन के अंत में रूप सज्जा में भाग लेने वाले सभी नन्हे प्रतिभागियों को विद्यालय परिवार की ओर से उपहार स्वरूप आकर्षक वॉटर बॉटल वितरित की गईं। उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती मुमताज बेगम खान, श्रीमती सुमन बड़ा, श्रीमती पूर्णिमा पात्रे और श्रीमती सीता रजक की सक्रिय भूमिका और गरिमामयी उपस्थिति रही। इस रंगारंग उत्सव ने न केवल बच्चों में भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि जगाई, बल्कि पूरे विद्यालय प्रांगण को गोकुल जैसा रूप दे दिया। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की: आधी रात टूटेगी माया की बेड़ियां, 46 मिनट के महामुहूर्त में पधारेंगे 5253वें साल के कान्हा!
नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की: आधी रात टूटेगी माया की बेड़ियां, 46 मिनट के महामुहूर्त में पधारेंगे 5253वें साल के कान्हा! घनघोर घटाएं, उफनती यमुना, जकड़ी हुई लोहे की बेड़ियां और कंस का खौफनाक पहरा... द्वापर युग का वही तिलिस्म आज फिर जीवंत हो उठा है। भाद्रपद की अंधेरी रात का सन्नाटा चीरते हुए आज ठीक आधी रात जब घड़ी की सुइयां 11:57 पर मिलेंगी, तब परब्रह्म के 5253वें प्राकट्य का शंखनाद होगा। रोहिणी नक्षत्र के साए में आज फिर कारागार के ताले अपने-आप चटकेंगे और सूप में सवार होकर नटखट कन्हैया भक्तों के घरों, मंदिरों और मखमली झूलों पर विराजेंगे। घड़ी की सुइयों पर नजर: 46 मिनट का दिव्य निशिता काल ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, प्रभु के अवतरण का सबसे पवित्र समय आधी रात का निशिता काल माना गया है: * प्रकटोत्सव का महामुहूर्त: रात 11:57 बजे से देर रात 12:43 बजे तक (कुल 46 मिनट, जब कान्हा का जन्मोत्सव और अभिषेक होगा)। * तिथि चक्र: अष्टमी तिथि 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक प्रभावी रहेगी। * पारण का समय: व्रत रखने वाले साधक 5 सितंबर को सुबह 05:47 बजे सूर्योदय के उपरांत ही अन्न-जल ग्रहण कर पारण करेंगे। चरणामृत से पालने तक: बाल गोपाल के स्वागत की 5 सीढ़ियां * पंचामृत से स्नान: दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल की शीतल धाराओं से देवकीनंदन का अभिषेक करें। * पीतांबर और मोरपंख: स्नान के बाद ठाकुर जी को चमचमाते पीले वस्त्र धारण कराएं, माथे पर चंदन का तिलक और मुकुट पर तिरछा मोरपंख सजाएं। * मनपसंद भोग: चांदी या मिट्टी की कटोरी में मिश्री मिला ताजा माखन और ऊपर एक पत्ता तुलसी दल—यह कान्हा का सबसे प्रिय भोग है। * घंट-घड़ियाल और आरती: शंख की गूंज और घंटियों की मधुर धुन के साथ 'आरती कुंजबिहारी की' गाकर माहौल को कृष्णमय करें। * झूला झुलाने की होड़: आरती के बाद बाल गोपाल को रेशमी डोरियों से बंधे पालने में विराजित कर श्रद्धा से झुलाएं। अग्नि पुराण की गवाही: क्यों हर उपवास से भारी है अष्टमी की यह रात? शास्त्र कहते हैं कि साल के 365 दिनों में यह एक रात ऐसी है, जो जन्म-जन्मांतर के संचित पापों के बंधनों को वैसे ही काट देती है, जैसे वसुदेव जी के पैरों की बेड़ियां कटी थीं। अग्नि पुराण के अनुसार, जो साधक इस रात जागकर निशिता काल में प्रभु का ध्यान करता है, उसके कुल का उद्धार तय माना जाता है और अंत समय में उसे वैकुंठ की प्राप्ति होती है। वो अमर गाथा: जब यमुना ने छुए नन्हे चरण आकाशवाणी से थर्राया कंस जब अपनी बहन देवकी के सात नवजातों को शिला पर पटक चुका था, तब आई वह आठवीं संतानी रात। मूसलाधार बारिश के बीच चतुर्भुज रूप में प्रकट होकर प्रभु ने लीला रची। पहरेदार सोए, जंजीरें खुलीं, और सूप में भगवान को सिर पर उठाए वसुदेव जी ने कदम बढ़ा दिए। गरजती लहरों वाली यमुना तब तक उफनती रही, जब तक उसने बालकृष्ण के चरण स्पर्श नहीं कर लिए। गोकुल में यशोदा की गोद में कान्हा मुस्कुराए और कंस के महलों में काल की उल्टी गिनती शुरू हो गई। आज वही रात है... मंदिरों में गूंजता घंटा, माखन की महक और पालने में झूलते लल्ला, यही गवाही दे रहे हैं कि जब-जब अधर्म की अति होगी, वासुदेव किसी न किसी रूप में उतर ही आएंगे। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पुरुष वर्ग टीम लगातार दूसरी बार बनी क्रॉस कंट्री चैंपियन*
*दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पुरुष वर्ग टीम लगातार दूसरी बार बनी क्रॉस कंट्री चैंपियन* *व्यक्तिगत स्पर्धा में हरीश ने हासिल किया दूसरा स्थान, विश्व रेलवे क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप के लिए भी चयनित* बिलासपुर, 03 सितम्बर 2026 दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने खेलों के क्षेत्र में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए 57वीं अखिल भारतीय अंतर-रेलवे क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप 2026 में पुरुष वर्ग का खिताब लगातार दूसरी बार अपने नाम किया है। यह प्रतियोगिता दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) स्पोर्ट्स एसोसिएशन, हुब्बली, कर्नाटक द्वारा आयोजित की गई, जिसमें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पुरुष एवं महिला टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पुरुष टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त कर अपना चैंपियन खिताब बरकरार रखा। विजेता टीम में हरीश, प्रिंस राज यादव, प्रिंस राज मिश्रा, अंकित देसवाल, रवि एवं दिनेश ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का प्रतिनिधित्व किया। व्यक्तिगत स्पर्धा में हरीश ने दूसरा तथा प्रिंस राज यादव ने पांचवां स्थान हासिल करते हुए टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। महिला वर्ग में भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। मुन्नी देवी, अंजली पटेल, निकिता लांबा, हिमांशी मलिक एवं शोभा यादव की टीम ने प्रतियोगिता में पांचवां स्थान प्राप्त किया। इस शानदार उपलब्धि पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्रीड़ा संघ के पदाधिकारियों तथा अधिकारियों ने सभी खिलाड़ियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए आगामी प्रतियोगिताओं में भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उल्लेखनीय है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के धावक श्री हरीश का चयन विश्व रेलवे क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप के लिए भी हुआ है। उनकी इस उपलब्धि पर भी क्रीड़ा संघ एवं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे परिवार ने उन्हें अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की पुरुष टीम की लगातार दूसरी बार इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में चैंपियन बनने की उपलब्धि से रेलवे के खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों में हर्ष का माहौल है। यह सफलता दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में खेल प्रतिभाओं को निरंतर मिल रहे प्रोत्साहन और खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, अनुशासन एवं उत्कृष्ट खेल भावना का परिणाम है। ************** अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
मानसून में छलका खूंटाघाट बांध: प्राकृतिक खूबसूरती निहारने उमड़ी सैलानियों की भारी भीड़
✍🏻 आशीष यादव ब्लॉक रिपोर्टर रतनपुर बिलासपुर छत्तीसगढ़ मानसून में छलका खूंटाघाट बांध: प्राकृतिक खूबसूरती निहारने उमड़ी सैलानियों की भारी भीड़ बिलासपुर/रतनपुर: बारिश के मौसम के साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यटन व पिकनिक स्थलों की रौनक लौट आई है। बिलासपुर जिले की ऐतिहासिक नगरी रतनपुर के समीप स्थित खूंटाघाट जलाशय (संजय गांधी जलाशय) इन दिनों पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लगातार हो रही मानसूनी बारिश के चलते बांध लबालब भर चुका है और इसके वेस्ट वियर (वेस्टवे) से पानी की चादर गिरती दिखाई दे रही है। प्रमुख बिंदु व दृश्य: मनोरम प्राकृतिक छटा: चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियों और घने जंगलों से घिरा यह बांध पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। वेस्ट वियर से गिरता तेज पानी एक प्राकृतिक झरने जैसा दृश्य पेश कर रहा है, जिसे देखने के लिए रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। सैलानियों की आवाजाही बढ़ी: सप्ताहांत (वीकेंड) के दौरान बिलासपुर, रायपुर और आसपास के जिलों से भारी संख्या में परिवार और युवा यहां पिकनिक मनाने पहुंच रहे हैं। लोग जलाशय की खूबसूरती के बीच फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और खान-पान का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं। नौकायन और सैर-सपाटा: जलाशय के शांत जलभराव और पहाड़ी नजारों को देखने के लिए सैलानी रैंप, सीढ़ियों और व्यू-पॉइंट्स पर चहलकदमी करते दिख रहे हैं। ठंडी हवाओं और बादलों की आवाजाही ने मौसम को बेहद सुहावना बना दिया है। सुरक्षा को लेकर प्रशासन की अपील: पानी के तेज बहाव और जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की है। वेस्ट वियर के तेज बहाव वाले पत्थरों, गहरे पानी और किनारों के पास जाकर सेल्फी लेने या स्टंट करने पर रोक लगाई गई है, ताकि किसी भी अप्रिय दुर्घटना से बचा जा सके।
हाई कोर्ट सख्त: डर के साये से उम्मीद की ओर, बालोद के एक परिवार ने दिया बेबस भाई-बहन को नया आशियाना*
🇮🇳 *हमर प्रदेश छत्तीसगढ न्यूज* 🇮🇳🎤 *ब्लॉक रिपोर्टर🎤 *संजय कुमार शुक्ला घुटकू* *बिलासपुर छत्तीसगढ* *हाई कोर्ट सख्त: डर के साये से उम्मीद की ओर, बालोद के एक परिवार ने दिया बेबस भाई-बहन को नया आशियाना* बिलासपुरः दुष्कर्म के आरोपों और असुरक्षा के माहौल से बाहर निकाले गए दो नाबालिग भाई-बहन अब अपने भविष्य को लेकर पहली बार उम्मीद भरी राह पर खड़े हैं। दोनों ने सौतेली बहन और उसके पति के पास लौटने से साफ इन्कार करते हुए एक साथ सुरक्षित परिवार में रहने की इच्छा जताई है। हाई कोर्ट की निगरानी में बालोद का एक पात्र परिवार उन्हें साथ रखने के लिए आगे आया है। फिलहाल काउंसलिंग और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। बालोद जिले का एक पात्र देखभाल परिवार दोनों भाई-बहन को एक साथ रखने के लिए तैयार हुआ है। संबंधित परिवार के साथ मूल्यांकन और काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है। हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है। कोर्ट ने राज्य सरकार से उस दिन तक दोनों बच्चों के फोस्टर केयर प्लेसमेंट की ताजा स्थिति बताने को कहा है। *अलग अलग संस्थानों में हैं बच्चे* मामले की याचिकाकर्ता और नाबालिग की सौतेली बहन ने हाई कोर्ट में बच्चों से संबंधित राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि दोनों बच्चों ने बार-बार महिला और उनके पति के पास लौटने की इच्छा से इन्कार किया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें फिलहाल अलग-अलग चाइल्ड केयर संस्थानों में रखा गया है। कलेक्टर, सरगुजा की ओर से दाखिल ताजा अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, बालक कक्षा पांचवीं और बालिका सातवीं में अंबिकापुर में अध्ययनरत है। दोनों की स्कूल उपस्थिति 100 प्रतिशत बताई गई है। *निगरानी की है विशेष व्यवस्था* जिला प्रशासन ने हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन में दोनों स्कूलों को विशेष सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं। सौतेली बहन और पति या किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को स्कूल या चाइल्ड केयर संस्थान में प्रवेश करने पर रोक लगाई गई है। बच्चों की निगरानी के लिए 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे और विजिटर रजिस्टर की व्यवस्था की गई है। प्रशासन के अनुसार, दोनों बच्चों को पोषण विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रतिदिन 2100 किलो कैलोरी वाला हाई-प्रोटीन और हाई-कैलोरी आहार दिया जा रहा है। अंबिकापुर मेडिकल कालेज अस्पताल में हुई जांच में दोनों बच्चों का स्वास्थ्य संतोषजनक पाया गया है। *चिंता और भय में आई कमी* क्लिनिकल साइकोलाजिस्ट द्वारा लगातार काउंसलिंग कराई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, बालक में चिंता और भय में कमी आई है, जबकि बालिका अब सहज और आत्मविश्वासी पाई गई है। हाई कोर्ट के निर्देश पर दोनों भाई-बहन की नियमित मुलाकात भी कराई जा रही है। *इस आधार पर दंपती का चयहन* जिला बाल संरक्षण इकाई ने 23 संभावित देखभाल वाले अभिभावकों की सूची तैयार की थी, जिसमें से 20 पात्र दंपतियों की संशोधित सूची प्रस्तुत की गई। बालोद जिले के एक पात्र परिवार ने दोनों भाई-बहन को एक साथ रखने में सकारात्मक रुचि दिखाई है। हाई कोर्ट में राज्य ने बताया कि बच्चों को एक ही परिवार में साथ रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को होगी। यह है मामला यह मामला तब शुरू हुआ जब बच्चों की सौतेली बहन ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। बच्चों ने कोर्ट में बताया कि याचिकाकर्ता के पति ने उनके साथ दुष्कर्म किया है, जिसके कारण वे बाल गृह में रह रहे हैं। इस जानकारी के बाद हाई कोर्ट ने बच्चों को सुरक्षित आशियाने में रखने का निर्णय लिया।
रीडर स्तर पर दबीं 21 हजार फाइलें! बिलासपुर संभाग में जमीनी विवादों के निराकरण की सुस्त रफ्तार से जनता हलकान*
🇮🇳 *हमर प्रदेश छत्तीसगढ न्यूज* 🇮🇳🎤 *ब्लॉक रिपोर्टर🎤 *संजय कुमार शुक्ला घुटकू* *बिलासपुर छत्तीसगढ* *रीडर स्तर पर दबीं 21 हजार फाइलें! बिलासपुर संभाग में जमीनी विवादों के निराकरण की सुस्त रफ्तार से जनता हलकान* बिलासपुर संभाग की राजस्व अदालतों में लंबित मामलों ने त्वरित निराकरण के प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। संभागीय समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन और अन्य राजस्व विवादों के मामलों में लोगों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा हैं l बड़ी संख्या में आवेदन प्राथमिक पंजीयन के अभाव में रीडरों के पास लंबित हैं, जिससे सुनवाई समय पर शुरू नहीं हो पाती। पटवारी की मौका जांच रिपोर्ट में देरी और पक्षकारों की आपत्तियों के कारण भी प्रकरण लंबे समय तक अटके रहते हैं। प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद आठों जिलों में राजस्व मामलों की पेंडेंसी आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। *आपसी सहमति न बनने से खिंचते हैं बंटवारे* ज़मीनों के नामांतरण और पारिवारिक खाता विभाजन में पटवारी मौका जांच और इश्तहार प्रकाशन के बाद आने वाली आपत्तियां मुख्य अड़चन बनती हैं। वारिसों के बीच सहमति न होने, सीमांकन में पड़ोसियों के विवाद और अभिलेखों में त्रुटि के चलते ये प्रकरण महीनों गवाही और साक्ष्य के फेर में अदालतों में खिंचते रहते हैं। *रीडर स्तर पर देरी से अटकती है सुनवाई* नागरिकों द्वारा आनलाइन या आफलाइन दिए गए आवेदनों की प्रारंभिक जांच, दस्तावेजों के मिलान और पेशी तारीख तय करने का जिम्मा न्यायालयीन रीडर का होता है। रीडर स्तर पर ही महीनों फाइलें दबी रहने से प्रकरण साफ्टवेयर में विधिवत दर्ज नहीं हो पाते। नतीजा यह होता है कि पीठासीन अधिकारी के सामने मामला पहुंचे बिना ही समय-सीमा खत्म होने लगती है। बिलासपुर संभाग के 8 जिलों की 254 राजस्व अदालतों में 4,277 मामले लंबित हैं, जबकि 21 हजार से अधिक आवेदन रीडरों के स्तर पर ही अटके हुए हैं। नामांतरण, सीमांकन, ll
अनिरुद्धाचार्य का जांजगीर आगमन
🇮🇳 *हमर प्रदेश छत्तीसगढ न्यूज* 🇮🇳🎤 *ब्लॉक रिपोर्टर🎤 *संजय कुमार शुक्ला घुटकू* *बिलासपुर छत्तीसगढ* छत्तीसगढ के जांजगीर जिले के बम्बहनी ग्राम में जयपुरहिया परिवार द्वारा 13 सितम्बर से 19 सितंबर तक भगवताआचार्य श्री अनिरुद्धा आचार्य जी द्वारा श्रीमद् भागवत कथा आयोजित होने जा रहा है l सभी छत्तीसगढ के वासियों को सादर आमंत्रित कर रहे हैं, भगवताआचार्य श्री अनिरुद्धा आचार्य जी द्वारा श्रीमद् भागवत कथा गंगा में डुबकी लगाने के लिए सप्रेमपूर्ण तरीके से सादर आमंत्रित कर रहे हैं l
26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आगाज़ कल केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू करेंगे शुभारंभ
26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आगाज़ कल केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू करेंगे शुभारंभ बिलासपुर, 2 सितंबर 2026/ बिलासपुर में 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन 3 से 6 सितंबर तक किया जाएगा। प्रतियोगिता में बेसबॉल, तैराकी और वॉटर पोलो की विभिन्न आयु वर्गों की स्पर्धाएं होंगी। राज्यभर से प्रतिभागी विद्यार्थी इसमें शामिल होंगे। प्रतियोगिता का शुभारंभ 3 सितंबर को सुबह 11 बजे पुलिस ग्राउंड, बिलासपुर में होगा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के राज्यमंत्री एवं बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री तोखन साहू होंगे। कार्यक्रम में तखतपुर विधायक श्री धर्मजीत सिंह, बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला, मस्तूरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, कोटा विधायक श्री अटल श्रीवास्तव, बिलासपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत बिलासपुर के अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री राजा पाण्डेय तथा ऊर्जा विकास अभिकरण निगम रायपुर के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।प्रतियोगिता के अंतर्गत बेसबॉल में 14, 17 एवं 19 वर्ष बालक-बालिका, तैराकी में 14, 17 एवं 19 वर्ष बालक-बालिका तथा वॉटर पोलो में 19 वर्ष बालक वर्ग की स्पर्धाएं आयोजित होंगी। प्रतियोगिता का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला प्रशासन बिलासपुर के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
रायगढ़ की बेटियों का अंतरराष्ट्रीय मंच पर बजा डंका: भारत को दिलाया कांस्य पदक, कलेक्टर ने किया सम्मानित
रायगढ़ की बेटियों का अंतरराष्ट्रीय मंच पर बजा डंका: भारत को दिलाया कांस्य पदक, कलेक्टर ने किया सम्मानित रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की बेटियों ने विदेशी जमीन पर अपने शानदार खेल कौशल का लोहा मनवाते हुए देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय लैक्रॉस टूर्नामेंट में भारतीय महिला लैक्रॉस टीम ने सिंगापुर को करारी शिकस्त देकर कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम कर लिया। भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक सफलता में रायगढ़ जिले के महलोई क्षेत्र की तीन होनहार खिलाड़ियों—सोनम बंजारा, शांति प्रधान और मानसी भूमिया ने निर्णायक भूमिका निभाई। सिंगापुर को हराकर जीता ब्रॉन्ज टीम के कोच देवावतार चौधरी ने बताया कि टूर्नामेंट के कड़े मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने जबरदस्त खेल कौशल और जुझारूपन का परिचय दिया। कांस्य पदक के लिए हुए अहम मुकाबले में टीम ने सिंगापुर को मात देकर पोडियम पर अपनी जगह पक्की की। कलेक्टर ने दी बधाई, आगे भी हर संभव मदद का भरोसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहराने के बाद तीनों खिलाड़ी अपने कोच के साथ कलेक्टोरेट पहुंचीं। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने खिलाड़ियों का मुंह मीठा कराकर उन्हें इस शानदार उपलब्धि की बधाई दी। कलेक्टर ने कहा कि रायगढ़ के ग्रामीण अंचल की बेटियों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतना पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आश्वस्त किया कि खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग और उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस मुलाकात के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अभिजीत बबन पठारे एवं एडीएम अपूर्व प्रियेश टोप्पो भी मौजूद रहे, जिन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। खिलाड़ियों और कोच ने इस मुकाम तक पहुंचने में मिले प्रशासनिक सहयोग के प्रति आभार जताया। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
अंधविश्वास और ढोंग के खिलाफ 35 वर्षों से मिसाल: बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम, जहाँ न दान लिया जाता है न झाड़-फूंक पर भरोसा
अंधविश्वास और ढोंग के खिलाफ 35 वर्षों से मिसाल: बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम, जहाँ न दान लिया जाता है न झाड़-फूंक पर भरोसा बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़) आस्था और अंधविश्वास के बीच की महीन लकीर को स्पष्ट करते हुए बलौदाबाजार का ज्योतिर्गमय आश्रम पिछले साढ़े तीन दशकों से समाज के लिए एक अनूठी मिसाल बना हुआ है। आचार्य पंडित प्रकाश शुक्ल (गुरुजी) के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र बिना किसी सरकारी या निजी चंदे के, विशुद्ध रूप से लोक कल्याण और चेतना जागृति का केंद्र बना हुआ है। "बीमारी है तो डॉक्टर के पास जाएं" अमूमन धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों पर बीमारियों का इलाज चमत्कारों से करने के दावे देखे जाते हैं, लेकिन ज्योतिर्गमय आश्रम का रुख इसके बिल्कुल उलट और वैज्ञानिक सोच के करीब है। गुरुजी का स्पष्ट संदेश है—"बीमारी का सही उपचार केवल योग्य और अनुभवी डॉक्टर ही कर सकते हैं।" वे झाड़-फूंक और जादू-टोने के नाम पर लोगों को ठगे जाने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार करते हैं। उनका मानना है कि वैदिक काल से चले आ रहे पारंपरिक घरेलू नुस्खे (जैसे चोट पर हल्दी-तेल का लेप) प्राथमिक राहत के साधन हैं और मंत्र-साधना से व्यक्ति का मनोबल मजबूत होता है, लेकिन यह चिकित्सीय इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। बिना दान-दक्षिणा की निस्वार्थ सेवा इस आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आर्थिक शुचिता है। विगत 35 वर्षों में आश्रम ने किसी भी श्रद्धालु या आगंतुक से एक रुपये का भी दान, दक्षिणा अथवा सहयोग राशि स्वीकार नहीं की है। जाति, वर्ग और संप्रदाय के भेदभाव से परे रहकर यह संस्थान केवल मानवीय संवेदनाओं के आधार पर संचालित होता है। प्रमुख स्तंभ: आश्रम के मुख्य संकल्प * अंधश्रद्धा उन्मूलन: तंत्र-मंत्र के नाम पर होने वाले पाखंड और आर्थिक-मानसिक शोषण को रोकना। * नशा मुक्ति अभियान: समाज को व्यसनों से मुक्त कर स्वस्थ जीवनशैली की ओर मोड़ना। * सद्भाव व वैदिक ज्ञान: सनातन धर्म के मूल मानवीय मूल्यों और वेदों के वास्तविक संदेश को जन-जन तक पहुंचाना। हर गुरुवार उमड़ता है आस्था का सैलाब माँ भगवती शव वाहनी काली के प्रति समर्पित इस प्रांगण में हर गुरुवार छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से 400 से 500 लोग पहुंचते हैं। यहाँ आने वालों का कहना है कि यहाँ कोई आडंबर नहीं, बल्कि जीवन की सही दिशा और मानसिक शांति मिलती है। आधुनिक दौर में जहाँ अध्यात्म अक्सर व्यापार का रूप लेता जा रहा है, वहीं ज्योतिर्गमय आश्रम 35 वर्षों से सेवा, सामाजिक सुधार और विवेकपूर्ण आस्था का वास्तविक केंद्र बनकर खड़ा है। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
राम मंदिर को जल्द मिलेगा पहला पूर्णकालिक CEO: 5,585 दिग्गजों की कतार से छंटे नाम, 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में लगेगी अंतिम मुहर
राम मंदिर को जल्द मिलेगा पहला पूर्णकालिक CEO: 5,585 दिग्गजों की कतार से छंटे नाम, 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में लगेगी अंतिम मुहर अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा तंत्र को अभेद्य बनाने के लिए चल रही सबसे बड़ी चयन प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति ने नामों का अंतिम पैनल तैयार कर लिया है। मंगलवार (1 सितंबर) को यह पैनल ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा जाएगा, जिसके बाद 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में राम मंदिर के पहले प्रशासनिक प्रमुख के नाम की घोषणा संभव है। चयन का पैमाना: 5,500 से अधिक आवेदन, पूर्व जस्टिस की समिति ने लिया इंटरव्यू अयोध्या राम मंदिर के CEO पद के लिए देश भर से नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों ने भारी दिलचस्पी दिखाई थी: * कुल आवेदन: 5,585 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की थी। * शॉर्टलिस्ट: गहन छंटनी के बाद अंतिम चरण के इंटरव्यू तक केवल 16 पूर्व IAS, IPS और रिटायर्ड सैन्य अधिकारी पहुंचे। * चयन समिति: चयन का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली समिति के पास था, जिसमें रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल रहे। समिति ने प्रशासनिक दक्षता, संकट प्रबंधन और वित्तीय शुचिता जैसे कड़े मानकों पर उम्मीदवारों को परखा। दौड़ में ये नाम सबसे आगे CEO पद की रेस में प्रशासनिक हलकों के कई वरिष्ठ नाम चर्चा में हैं: * राजेश पांडेय (पूर्व IPS): मजबूत दावेदार, जिनका दो बार विस्तृत साक्षात्कार हुआ। * योगेश्वर राम मिश्रा (पूर्व IAS): प्रशासनिक अनुभव के चलते मजबूत पकड़। * परेश सक्सेना (पूर्व DGP, बिहार): शीर्ष स्तर के सुरक्षा और पुलिस प्रबंधन के अनुभव के साथ दौड़ में शामिल। नोट: आधिकारिक नाम का खुलासा 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक के बाद ही होगा। क्यों पड़ी पूर्णकालिक CEO की जरूरत? मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी आमद के बीच बीते दिनों चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। इसके बाद प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और व्यवस्थाओं को पेशेवर बनाने के लिए पूर्णकालिक CEO की तलाश तेज हुई। नए CEO के कंधों पर होंगी ये प्रमुख जिम्मेदारियां: * वित्तीय पारदर्शिता: करोड़ों के दैनिक चढ़ावे और दान का पूर्ण डिजिटाइजेशन व पारदर्शी ऑडिट। * भीड़ व सुरक्षा प्रबंधन: लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और परिसर की सुरक्षा का त्रिस्तरीय समन्वय। * रोजमर्रा का संचालन: विशाल मंदिर परिसर का दैनिक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक प्रबंधन। प्रशासनिक बदलाव: जगदीश आफले बन सकते हैं पहले सचिव CEO के अलावा राम मंदिर ट्रस्ट अपने पूरे प्रशासनिक ढांचे को नया रूप दे रहा है। 2 सितंबर की बैठक में जगदीश आफले को ट्रस्ट का पहला 'सचिव' नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है। यदि ये दोनों नियुक्तियां तय समय पर होती हैं, तो अयोध्या राम मंदिर का संचालन अब पूरी तरह कॉर्पोरेट और पेशेवर प्रशासनिक मॉडल पर संचालित होगा। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी