25 करोड़ का ‘हल्दी बीज’ घोटाला: किसानों के नाम पर अरबों की बाजीगरी, कागजों पर दौड़ी फर्जी समिति; डबल इंजन सरकार में 'मामा' शिवराज और साय प्रशासन कब तोड़ेगा चुप्पी?
विशेष संपादकीय / खोजी रिपोर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 'जीरो टॉलरेंस' के सरकारी दावों पर 25 करोड़ रुपये के कथित हल्दी बीज घोटाले ने ऐसा दाग लगा दिया है, जो धोने से नहीं छूट रहा। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्नत खेती के नाम पर सरकारी खजाने से 25 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा कर लिया गया, और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सहकारी समिति के जरिए आपूर्ति का दावा किया गया, उसका अस्तित्व ही जमीनी स्तर पर सिर्फ कागजों में सिमटा मिला।
अब सवाल केवल कृषि विभाग के कारिंदों तक सीमित नहीं है; तीखा सवाल 'डबल इंजन' की रफ्तार और दिल्ली के नीति-नियंताओं से भी है—केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का सख्त तंत्र आखिर इस पर कब जागेगा?

कागजी सहकारी समिति, 25 करोड़ का फर्जी खेल
पूरा मामला उद्यानिकी एवं कृषि विभाग से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां किसानों को वितरित करने के नाम पर 25 करोड़ रुपये के हल्दी बीज की खरीद दिखाई गई। जांच और दस्तावेजों के दावों के मुताबिक:
* सप्लायर केवल फाइलों में: जिस सहकारी समिति के जरिए करोड़ों के बीजों की आवक और सप्लाई दिखाई गई, वह धरातल पर नदारद है।

* फर्जी बिलिंग का महाजाल: न वास्तविक बीज की आमद, न किसानों तक सही वितरण का पारदर्शी लेखा-जोखा; केवल फर्जी बिलों और वाउचरों के सहारे सरकारी खजाने से निकासी का खेल खेला गया।
* सवालों के घेरे में विभागीय मुखिया: कृषि मंत्री और शीर्ष अफसरशाही अब जनता और विपक्ष के तीखे सवालों के घेरे में आ गई है कि आखिर विभागीय नाक के नीचे इतने बड़े घोटाले की पटकथा कैसे तैयार हो गई?

डबल इंजन पर कटाक्ष: ‘शिवराज जी, क्या दिल्ली तक नहीं पहुंच रही किसानों के नाम पर लूट की गूंज?’
मध्य प्रदेश में लंबे समय तक ‘किसान पुत्र’ और ‘मामा’ की छवि गढ़ने वाले शिवराज सिंह चौहान अब केंद्र में कृषि मंत्रालय की कमान संभाल रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में खुद को सुशासन का ध्वजवाहक बताने वाली साय सरकार बैठी है। ऐसे में प्रदेश के जागरूक नागरिक और किसान अब सीधा कटाक्ष कर रहे हैं:
> "जब चुनाव आते हैं तो डबल इंजन का डंका पीटा जाता है, लेकिन जब किसानों के नाम पर 25 करोड़ रुपये की हल्दी हजम कर ली जाती है, तो इंजन का हॉर्न अचानक म्यूट क्यों हो जाता है? क्या शिवराज जी का ध्यान केवल भाषणों तक सीमित है या फिर अपनी ही पार्टी की राज्य सरकारों में हो रहे इस बीज सिंडिकेट पर भी कोई केंद्रीय एजेंसी (CBI/ED) बैठेगी?"
सिस्टम से सीधे 4 तीखे सवाल:
* अफसर-नेता गठजोड़ पर पर्दा क्यों: कागजी समिति को 25 करोड़ का भुगतान स्वीकृत करने वाले वित्त और कृषि विभाग के आला अधिकारियों पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई?
* बीज कहां गया, पैसा किसकी जेब में: अगर समिति फर्जी थी, तो 25 करोड़ की भारी-भरकम राशि किन-किन रसूखदारों के निजी खातों और बेनामी निवेशों में खपाई गई?
* क्या होगी सीबीआई या स्वतंत्र एसआईटी जांच: क्या सरकार केवल लीपापोती वाली विभागीय जांच कमेटी बनाकर मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहती है, या स्वतंत्र न्यायिक/केंद्रीय जांच होगी?
* किसानों के हक पर डकैती की भरपाई कब: उन्नत किस्म की हल्दी उगाने का सपना देखने वाले प्रदेश के मेहनतकश किसानों को धोखा देने वालों की संपत्ति कब कुर्क होगी?
'सुशासन' और 'पारदर्शिता' की कसौटी नारों से नहीं, बल्कि ऐसे मामलों में ताबड़तोड़ कार्रवाई से सिद्ध होती है। यदि 25 करोड़ के इस फर्जीवाड़े पर लीपापोती की गई, तो यह संदेश साफ जाएगा कि सिस्टम में कुर्सी कोई भी संभाले, घोटालेबाजों की फसल हमेशा लहलहाती रहेगी।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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