Tuesday, October 27 2026
ताज़ा ख़बरें

Loading...

9 महीने की जेल, झूठा इल्जाम और गरीबी की बेबसी: जब एडवोकेट प्रशांत मिश्रा बने 'न्याय की ढाल', पुलिस विवेचना की खुली पोल!

State Head - State_head_abhishek
State Head - State_head_abhishek
71 Views 5 Min Read 0 Comments
9 महीने की जेल, झूठा इल्जाम और गरीबी की बेबसी: जब एडवोकेट प्रशांत मिश्रा बने 'न्याय की ढाल', पुलिस विवेचना की खुली पोल!

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ 

 

9 महीने की जेल, झूठा इल्जाम और गरीबी की बेबसी: जब एडवोकेट प्रशांत मिश्रा बने 'न्याय की ढाल', पुलिस विवेचना की खुली पोल!

 

 

कानपुर नगर:

सलाखों के पीछे बीते 270 दिन, समाज की चुभती निगाहें और जेब में मुकदमे की फीस तक के पैसे नहीं... POCSO जैसे संगीन मामले में फंसे विजय नाथ के लिए यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपने वजूद और सम्मान को बचाने की जंग थी। लेकिन जब व्यवस्था की लाचारी के आगे उम्मीदें दम तोड़ने लगीं, तब कानून की चौखट पर सच की ढाल बनकर खड़े हुए नेशनल मीडिया प्रेस क्लब अधिवक्ता मोर्चा के जिलाध्यक्ष एडवोकेट प्रशांत मिश्रा।

नतीजा? अदालत में खुली पुलिस की लचर विवेचना की पोल, और अदालत ने विजय नाथ को बाइज्जत बरी कर दिया।

मुफ्त पैरवी, धारदार दलीलें और पलट गया पूरा केस

मुकदमा अपराध संख्या 74/2023 के तहत जेल में बंद विजय नाथ की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वह किसी बड़े वकील का खर्च नहीं उठा सकते थे। ऐसे नाजुक मोड़ पर एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने बिना कोई फीस लिए (निःशुल्क) यह केस अपने हाथ में लिया।

उन्होंने केस डायरी, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को जब बारीकी से खंगाला, तो पुलिसिया जांच की कई बड़ी खामियां और विरोधाभास उजागर हुए।

अदालत का फैसला: निर्दोष को मिला इंसाफ

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट, कोर्ट संख्या-20) पवन कुमार राय की अदालत में जब एडवोकेट प्रशांत मिश्रा ने साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की कमजोरियों को बेनकाब किया, तो अभियोजन पक्ष के दावे टिक नहीं सके। अदालत ने तमाम साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद विजय नाथ को पूरी तरह निर्दोष करार देते हुए रिहा करने का आदेश सुनाया।

बड़ा सवाल: 9 महीनों के दर्द और बदनामी की भरपाई कौन करेगा?

यह फैसला सिर्फ एक कैदी की रिहाई नहीं, बल्कि सिस्टम के मुंह पर एक तमाचा भी है।

 * क्या पुलिस की जल्दबाजी या कमजोर विवेचना किसी निर्दोष की जिंदगी बर्बाद करने का लाइसेंस है?

 * जेल में कटे उन 9 महीनों और उस दौरान परिवार पर टूटे दुखों के पहाड़ का जिम्मेदार कौन?

इस फैसले ने एक बार फिर साबित किया कि पुलिस की चार्जशीट अंतिम सच नहीं होती, फैसला अदालत के तराजू पर ही तय होता है।

कानूनी बिरादरी में हर्ष की लहर, वकीलों ने दी बधाई

गरीब और मजलूम को न्याय दिलाने की इस ऐतिहासिक पहल पर नेशनल मीडिया प्रेस क्लब के सदस्यों और पदाधिकारियों ने एडवोकेट प्रशांत मिश्रा की सराहना की। इस मौके पर 'द लॉयर्स एसोसिएशन' के कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट अवधेश सिंह तोमर और एडवोकेट धनराज सिंह चौहान विशेष रूप से मौजूद रहे और इस शानदार पैरवी के लिए उन्हें बधाई दी।

> "जहां गरीब की आवाज कमजोर पड़ जाए, वहां कानून को उसकी सबसे बड़ी ताकत बनना चाहिए। गरीबी कभी न्याय की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।"

> — नेशनल मीडिया प्रेस क्लब अधिवक्ता मोर्चा

 

हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ 

 

 

State Head - State_head_abhishek
Written by

State Head - State_head_abhishek

Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

Comments (0)

Leave a Comment

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Latest Videos