LIC पॉलिसी सरेंडर करने पर जमा राशि को लेकर शिकायत, कलेक्टर से न्याय की गुहार
छह साल तक जमा किया प्रीमियम, करीब 25 हजार रुपये मिलने का दावा; पॉलिसी की शर्तों के अनुसार राशि स्पष्ट करने की मांग
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज़ | hamarpradeshcg.com
कांकेर, छत्तीसगढ़। जिले के चारामा क्षेत्र निवासी रवि शंकर सिन्हा ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की पॉलिसी सरेंडर करने के बाद मिलने वाली राशि को लेकर शिकायत की है। शिकायतकर्ता ने अपनी जमा राशि और सरेंडर के दौरान मिली रकम के संबंध में उचित जांच कर समाधान दिलाने की मांग की है।
शिकायतकर्ता रवि शंकर सिन्हा के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2018 के आसपास LIC पॉलिसी ली थी और लगभग छह वर्षों तक प्रतिवर्ष ₹12,794 के हिसाब से प्रीमियम जमा किया। इस दौरान उनकी माता की तबीयत खराब होने और आर्थिक परेशानियों के चलते उन्हें पॉलिसी सरेंडर करनी पड़ी।
उनका दावा है कि पॉलिसी सरेंडर करने के बाद उनके बैंक खाते में लगभग ₹25,000 की राशि प्राप्त हुई, जबकि उनके अनुसार छह वर्षों में जमा किया गया कुल प्रीमियम करीब ₹80,000 था। इसी अंतर को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं और अपनी राशि के संबंध में स्पष्ट जानकारी मांगी है।
कलेक्टर से की उचित कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने LIC कार्यालय में भी अपनी समस्या के समाधान के लिए आवेदन देने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित समाधान नहीं मिल पाया। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर से मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई करने और नियमानुसार देय राशि के संबंध में समाधान दिलाने की मांग की है।
LIC प्रबंधन ने क्या कहा?
मामले में संबंधित कार्यालय का पक्ष जानने के लिए मीडिया द्वारा संपर्क किया गया। वरिष्ठ शाखा प्रबंधक ज्ञानेंद्र तिवारी की ओर से बताया गया कि शिकायतकर्ता को आवेदन और प्रक्रिया से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रथम तल पर जाने को कहा गया था। वहां शिकायत एवं आगे की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी मिल सकती है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि वे अधिकृत नहीं होने के कारण इस विषय पर बाइट नहीं दे सकते। मामले में आगे की स्थिति कार्यालय से मिलने वाले जवाब के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
पॉलिसी की शर्तों के आधार पर तय होगी देय राशि
LIC पॉलिसी सरेंडर करने पर मिलने वाली राशि पॉलिसी के प्रकार, उसकी शर्तों, प्रीमियम भुगतान की अवधि और लागू सरेंडर वैल्यू के नियमों पर निर्भर करती है। इसलिए केवल कुल जमा प्रीमियम और प्राप्त राशि के अंतर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शेष पूरी राशि पॉलिसीधारक को देय है।
ऐसे में संबंधित पॉलिसी के दस्तावेजों, प्रीमियम भुगतान के रिकॉर्ड और सरेंडर वैल्यू की गणना की जांच महत्वपूर्ण होगी।
अब देखना होगा कि शिकायतकर्ता की मांग पर संबंधित विभाग क्या कदम उठाता है और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार उन्हें कितनी राशि देय थी, इस संबंध में क्या स्पष्टता सामने आती है।
✍️ रिपोर्टर: शैलेन्द्र जैन
पद: जिला रिपोर्टर, कांकेर
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नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और संबंधित अधिकारी से प्राप्त प्रारंभिक पक्ष पर आधारित है। मामले में अंतिम निष्कर्ष पॉलिसी दस्तावेजों, आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित विभाग के लिखित जवाब के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
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