स्टेट रिपोर्टर अभिषेक कुमार की रिपोर्ट
रायगढ़। 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना की ऐतिहासिक विजय का साक्षी और दुश्मन के टैंकों व बंकरों को ध्वस्त करने वाला वीर T-55 युद्धक टैंक अब रायगढ़ की धरती पर पहुंच चुका है। यह केवल एक सैन्य वाहन नहीं, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति का जीवंत प्रतीक है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के पीछे पूर्व जिला सैनिक कल्याण अधिकारी एवं टैंक रेजिमेंट के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी कर्नल आशीष पाण्डेय की वर्षों की मेहनत, सैन्य मुख्यालय से निरंतर समन्वय और अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जानकारी के अनुसार, कर्नल आशीष पाण्डेय ने रायगढ़ के अमर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की स्मृतियों को स्थायी स्वरूप देने तथा युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से इस युद्ध-वीर टैंक को रायगढ़ लाने की पहल की। उनकी पहल को शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी के परिजनों तथा तत्कालीन कलेक्टर कार्तिकेय गोयल का भी सहयोग मिला। सेना मुख्यालय की सभी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद लगभग 45 टन वजनी T-55 टैंक को पुणे स्थित सैन्य डिपो से रायगढ़ लाया गया।
शहर के इंदिरा विहार स्थित सिंदूर पार्क में इस टैंक की स्थापना की तैयारी की जा रही है। विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से विकसित सिंदूर पार्क पहले ही ऑक्सीजन पार्क और जनसुविधाओं के लिए पहचान बना चुका है। अब यहां T-55 टैंक स्थापित होने से यह स्थल राष्ट्रभक्ति और सैन्य गौरव का नया केंद्र बनेगा।
कर्नल आशीष पाण्डेय ने बताया कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में पश्चिमी मोर्चे पर T-55 टैंकों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। दिसंबर 1971 में इन टैंकों ने लगभग 100 से अधिक दुश्मन के टैंकों और बंकरों को ध्वस्त किया तथा बारूदी सुरंगों वाले क्षेत्रों में सुरक्षित रास्ता बनाकर पैदल सेना की प्रगति सुनिश्चित की। पूर्वी मोर्चे पर भी इन टैंकों ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारतीय सेना की विजय में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके बाद भी T-55 टैंक ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम जैसे अभियानों में देश की सेवा करता रहा। लगभग 38 वर्षों तक सेवा देने के बाद वर्ष 2009 में इसे सम्मानपूर्वक सेवा से मुक्त किया गया।
कर्नल पाण्डेय का कहना है कि सैन्य परंपराओं के अनुरूप इस टैंक का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसके बाद जब यह अपनी विशाल तोप के साथ सिंदूर पार्क में स्थापित होगा, तब यह केवल एक युद्धक मशीन नहीं बल्कि भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास की जीवंत गाथा बन जाएगा। यहां आने वाले बच्चे, विद्यार्थी और युवा 1971 के युद्ध, भारतीय सेना के पराक्रम तथा सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बारे में जान सकेंगे।
शहर के अनेक नागरिकों ने सुझाव दिया है कि इस युद्ध-वीर टैंक का नाम रायगढ़ के अमर शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी की स्मृति में "विप्लव" रखा जाए, ताकि यह स्मारक उनके अद्वितीय बलिदान और देशभक्ति की भावना को सदैव जीवित रख सके।
रायगढ़वासियों का मानना है कि जिस प्रकार देश के अन्य शहरों में युद्ध स्मारक लोगों को सेना के इतिहास से जोड़ते हैं, उसी प्रकार यह T-55 टैंक भी रायगढ़ की नई पहचान बनेगा। सिंदूर पार्क में हर दिन आने वाले हजारों नागरिक और बच्चे इस वीर टैंक को देखकर भारतीय सेना के प्रति सम्मान, राष्ट्रप्रेम और देशसेवा की प्रेरणा प्राप्त करेंगे।
कर्नल आशीष पाण्डेय के सतत प्रयासों से रायगढ़ को मिली यह ऐतिहासिक सैन्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमारे वीर सैनिकों का बलिदान सदैव सर्वोपरि है।
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