Tuesday, October 27 2026
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कवर्धा में पीएम जनमन योजना में घोर लापरवाही - 2.06 करोड़ की सड़क के बीचों-बीच 11,000 वोल्ट का पोल, जनता की जान खतरे में

MANOJ@HAMARPRADESHCG
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कवर्धा में पीएम जनमन योजना में घोर लापरवाही - 2.06 करोड़ की सड़क के बीचों-बीच 11,000 वोल्ट का पोल, जनता की जान खतरे में

स्टेट रिपोर्टर मनोज भट्ट हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ 

 

कवर्धा में पीएम जनमन योजना में घोर लापरवाही - 2.06 करोड़ की सड़क के बीचों-बीच 11,000 वोल्ट का पोल, जनता की जान खतरे में

 

छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पीएम जनमन योजना के तहत जिले में बनाई गई एक सड़क ने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिए गए, लेकिन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया।

 

*मामला कहां का है?*

यह मामला कवर्धा जिले के चिमरा से बरभावर मिडिल स्कूल तक बनाई गई सड़क का है।

 

*निर्माण का ब्यौरा:*

1. योजना: प्रधानमंत्री जनमन योजना

2. लंबाई: लगभग 3 किलोमीटर सीसी रोड + पुलिया

3. स्वीकृत लागत: 2 करोड़ 6 लाख रुपये

4. निर्माण एजेंसी: पीएमजीएसवाई विभाग के अधीन ठेकेदार द्वारा

5. शुरुआत: मार्च 2024 में कार्य प्रारंभ, मार्च 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य

 

*लापरवाही क्या हुई?*

मौके पर जाकर देखने से पता चलता है कि पूरी सड़क और पुलिया बना दी गई है, लेकिन सड़क के ठीक सेंटर में 11,000 वोल्ट का हाईटेंशन बिजली पोल आज भी खड़ा है। 

 

नियम के अनुसार सड़क निर्माण से पहले विद्युत पोल, पेड़, या किसी भी अवरोध को चिन्हित कर विद्युत विभाग से समन्वय कर शिफ्ट किया जाना था। यहां ऐसा कुछ नहीं किया गया। ठेकेदार ने अपना काम पूरा कर बिल भी ले लिया, लेकिन पोल को वहीं छोड़ दिया। इससे साफ है कि जमीनी सर्वे केवल कागजों पर हुआ है।

 

*खतरा कितना बड़ा है?*

ग्रामीणों के अनुसार यह पोल अब किसी टाइम बम से कम नहीं है।

- रात में लाइट न होने से दोपहिया वाहन चालक सीधे पोल से टकरा सकते हैं।

- 11 हजार वोल्ट करंट होने से टक्कर होने पर मौके पर ही मौत या आगजनी की संभावना है।

- स्कूली बच्चों का रोज इसी मार्ग से आना-जाना है, जो सबसे ज्यादा जोखिम में

- हैं।  

- - एम्बुलेंस और ट्रैक्टर जैसे बड़े वाहन इस पोल के कारण आधा रास्ता रोककर निकलते हैं।

 

*ग्रामीणों के 3 सवाल प्रशासन से:*

 

1. जब सर्वे हुआ तो क्या इंजीनियरों को बीच सड़क पर खड़ा पोल दिखाई नहीं दिया?

2. पोल शिफ्टिंग का खर्च एस्टीमेट में क्यों नहीं जोड़ा गया? अगर जोड़ा गया था तो पैसा कहां गया?

3. सड़क बनने के बाद फाइनल निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उसने इस जानलेवा खामी को कैसे पास कर दिया?

 

*हमारी मांग:*

1. तत्काल प्रभाव से इस हाईटेंशन पोल को सड़क से हटाकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

2. इस पूरी लापरवाही की जांच के लिए कलेक्टर महोदय द्वारा एक जांच कमेटी गठित की जाए।

3. दोषी ठेकेदार और संबंधित इंजीनियर की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाए और दोबारा होने वाले खर्च की वसूली उन्हीं से की जाए।

 

यह सिर्फ एक पोल का मामला नहीं है, यह जनता के टैक्स के पैसे के दुरुपयोग का मामला है।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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