कुर्सी-कुर्सी का खेल: 13 महीने में 3 DEO बदले, 30 लाख का घमासान... ऐसे सुधरेगा बिलासपुर का गिरता रिजल्ट?
बिलासपुर:
जिले की लचर शिक्षा व्यवस्था और बोर्ड परीक्षाओं के निराशाजनक परिणामों पर कलेक्टर साहब कड़े तेवर दिखा रहे हैं, समीक्षा बैठकों में अफसरों की क्लास ली जा रही है, लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि बिलासपुर शिक्षा विभाग खुद 'वेंटीलेटर' पर है। जिस विभाग के पास अपना एक स्थायी मुखिया तक नहीं है, वह लाखों नौनिहालों का भविष्य कैसे संवारेगा? कागजों में सुधार के बड़े-बड़े दावे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का दफ्तर सिर्फ फाइलों की 'आवक-जावक शाखा' बनकर रह गया है।
13 महीने में 3 चेहरे बदले, बोर्ड पर रवानगी की तारीख तक गायब
विभाग में अफसरों के आने-जाने की रफ्तार इतनी तेज है कि दफ्तर के बाहर लगी नेमप्लेट भी शर्मसार हो जाए।
* अनिश्चितता का आलम: डॉ. अनिल तिवारी के हटने के बाद पिछले एक साल में तीन अफसरों को जिम्मेदारी थमाई गई—विजय टांडे, रामेश्वर जायसवाल और वर्तमान में डॉ. अजय कौशिक।
* बोर्ड पर सन्नाटा: दफ्तर में लगे सूची बोर्ड पर नए अधिकारियों की पदस्थापना की तारीख तो दर्ज हो जाती है, लेकिन कार्यमुक्त होने वाले कॉलम में सन्नाटा पसरा रहता है।
* उल्टी गिनती शुरू: वर्तमान प्रभारी DEO डॉ. अजय कौशिक 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यानी कुछ ही दिनों में जिले का शिक्षा महकमा फिर से बिना सेनापति के अधर में लटकने वाला है।
विवादों, एसीबी और ₹30 लाख की 'डील' की गूंज
शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले इस विभाग की साख विवादों के दलदल में धंस चुकी है:
* भ्रष्टाचार की छाया: पूर्व डीईओ टी.आर. साहू का कार्यकाल एसीबी (ACB) की कार्रवाई और जांचों के साए में बीता।
* आरोपों की झड़ी: इसके बाद आए डॉ. अनिल तिवारी भी विवादों और शिकायतों के घेरे में आने के बाद कुर्सी गंवा बैठे।
* 30 लाख का कथित खेल: गलियारों में शिक्षा विभाग की मलाईदार 'हॉट सीट' को लेकर 30 लाख रुपये के लेन-देन की चर्चाएं जोरों पर हैं, जिसने पूरे सिस्टम की शुचिता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
कलेक्टर की फटकार बेअसर, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सत्र 2025-26 के खराब परीक्षा परिणामों को लेकर सख्त हिदायत दी है। लेकिन बुनियादी सवाल यही है कि जब कमान संभालने वाला अफसर ही 'अस्थायी' और चंद दिनों का मेहमान हो, तो शिक्षकों की मनमानी पर लगाम कौन कसेगा? स्कूलों की मॉनिटरिंग कौन करेगा?
जब तक शासन बिलासपुर को कोई सक्षम और स्थायी जिला शिक्षा अधिकारी नहीं देता, तब तक बैठकों में दी जाने वाली प्रशासनिक घुड़की महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी और खामियाजा जिले के मासूम छात्र भुगतते रहेंगे।
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