कोटा क्षेत्र के 7 गांवों के जंगलों में सागौन कटाई का आरोप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने जांच और कार्रवाई की मांग की, बेलगहना सर्कल के जंगलों में बड़े पैमाने पर कटाई का दावा
बिलासपुर/कोटा। बिलासपुर जिले के कोटा वन परिक्षेत्र अंतर्गत बेलगहना सर्कल के जंगलों में सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई किए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि बेलगहना सर्कल के अंतर्गत आने वाले केकराडी, करही कछार, बेलगहना, बहेरामुड़ा, कुरदर, टेगनमाड़ा और करवा गांवों के आसपास जंगलों में लगातार हरे सागौन के पेड़ों की कटाई की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर पेड़ों को काटकर उनके बड़े-बड़े लट्ठे जंगल के भीतर ही रखे जा रहे हैं। इस संबंध में सामने आई तस्वीरों में कटे हुए पेड़ों के लट्ठे और लकड़ी का बुरादा दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कटाई के बाद लकड़ी को वाहनों के माध्यम से बाहर ले जाने की आशंका है।
जंगल के भीतर लकड़ी काटने के आरोप
स्थानीय लोगों के मुताबिक सागौन के पेड़ों को काटकर करीब 10 से 12 फीट लंबे लट्ठों में तैयार किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर कटे हुए लट्ठों को एकत्र कर रखे जाने की बात भी सामने आई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय लकड़ी को जंगल से बाहर ले जाया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले की वास्तविक स्थिति वन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वन विभाग की निगरानी पर सवाल
इतने बड़े पेड़ों की कटाई और लकड़ी को जंगल से बाहर ले जाने के आरोपों के बीच स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में लगातार गश्त और निगरानी के बावजूद यदि कटाई हो रही है तो इसकी जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित वन अमले की जानकारी के बिना इतने बड़े स्तर पर कटाई संभव नहीं हो सकती। हालांकि वन विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
DFO से जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने बिलासपुर वनमंडल के DFO से मामले को गंभीरता से लेते हुए बेलगहना सर्कल के संबंधित जंगलों का निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही कटे हुए पेड़ों और लकड़ी के लट्ठों की जांच, जब्ती तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जंगलों में अवैध कटाई की शिकायत सही पाई जाती है तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि वन संपदा को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
नोट: इस रिपोर्ट में लगाए गए मिलीभगत और लकड़ी तस्करी संबंधी आरोप स्थानीय ग्रामीणों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित वन विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
क्राइम रिपोर्टर — रितेश पटेल, बिलासपुर
हमर प्रदेश न्यूज़ छत्तीसगढ़
hamarpradeshcg.com
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