✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन के दौरान कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। अंबिकापुर स्थित अमेरा खदान से तिल्दा की एक स्टील कंपनी के लिए भेजे गए करीब 70 टन कोयले के परिवहन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता कंपनी का आरोप है कि परिवहन के दौरान कोयले की हेराफेरी हुई है। इस मामले में तिल्दा-नेवरा थाने में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। हालांकि, शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
GPS रिपोर्ट में ट्रकों के लंबे ठहराव का दावा
जानकारी के अनुसार, स्वास्तिक एनर्जी एंड मिनरल्स बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड ने 17 अक्टूबर को तिल्दा-नेवरा थाने में शिकायत प्रस्तुत की थी। कंपनी ने शिकायत में कोयला परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड का हवाला देते हुए मामले की जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
कंपनी के दावे के मुताबिक, GPS ट्रैकिंग रिपोर्ट में एक ट्रक के पथरिया में करीब 6 घंटे 48 मिनट और दूसरे ट्रक के उदयपुर में लगभग 8 घंटे 30 मिनट तक रुके रहने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में अन्य स्थानों पर भी ट्रकों के लंबे समय तक ठहराव का उल्लेख किया गया है।
इन ठहरावों की परिस्थितियों और कोयले के परिवहन से इनके संबंध की जांच होना जरूरी है। हालांकि, केवल GPS रिकॉर्ड में ट्रक के रुकने से कोयले की चोरी या हेराफेरी की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए अन्य साक्ष्यों का सत्यापन आवश्यक है।
शिकायत में साक्ष्यों की जांच की मांग
शिकायतकर्ता कंपनी ने GPS ट्रैकिंग डेटा, समय-मुद्रांकित कैमरा रिकॉर्ड और परिवहन दस्तावेजों को जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया है। कंपनी ने कुछ लोगों की भूमिका की भी जांच करने की मांग की है।
इस मामले में कई अहम सवाल उठ रहे हैं। क्या पुलिस ने GPS रिकॉर्ड और परिवहन दस्तावेजों की जांच शुरू की है? क्या संबंधित ट्रकों का भौतिक निरीक्षण किया गया है? क्या टोल प्लाजा, FASTag और धर्मकांटा के रिकॉर्ड का मिलान कराया गया है? क्या कथित ठहराव वाले स्थानों पर जांच की गई है?
इन सवालों के जवाब जांच की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
FIR दर्ज करने की स्थिति पर सवाल
कंपनी की ओर से लिखित शिकायत दिए जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में शिकायत पर पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है, यह जानना जरूरी है।
यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध के पर्याप्त तथ्य सामने आते हैं, तो लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार पुलिस की कार्रवाई अपेक्षित है। मामले में निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कोयले के परिवहन में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
करीब 70 टन कोयले के परिवहन से जुड़े इस मामले में GPS रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
अब देखना होगा कि तिल्दा-नेवरा पुलिस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और जांच के बाद मामले में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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