✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
महासमुंद, छत्तीसगढ़। खैर लकड़ी की कथित अवैध तस्करी, फर्जी एनओसी और बिलिंग नेटवर्क के मामले में महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को गिरफ्तार किया है। आरोपी के ठिकाने से जुड़े मामले में पुलिस ने 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, अब तक विभिन्न राज्यों में कार्रवाई के दौरान कुल 70 टन अवैध खैर लकड़ी बरामद की जा चुकी है।
कई राज्यों में पुलिस की दबिश
महासमुंद पुलिस की विशेष टीम ने खैर लकड़ी की कथित तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के तहत हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा और मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में कार्रवाई की है। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश में मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया से जुड़े कथित अवैध कारोबार से संबंधित 1.70 करोड़ रुपये नकद जब्त किए। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा में आरोपी मनीष अग्रवाल के मकान से 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे।
हरियाणा के गोदाम से 15 टन खैर लकड़ी बरामद
पुलिस के मुताबिक, 10 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले की पटौदी तहसील के ग्राम बहोड़ा कलां स्थित श्री बालाजी ट्रेडिंग फर्म के गोदाम में तलाशी ली गई। यह फर्म आरोपी मनीष अग्रवाल से संबंधित बताई गई है। तलाशी के दौरान गोदाम से करीब 15 टन खैर लकड़ी बरामद कर जब्त की गई।
पुलिस का कहना है कि विभिन्न राज्यों में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक लगभग 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश से शिव ट्रेडर्स का संचालक गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से 67 वर्षीय सतपाल सिंह को गिरफ्तार किया। आरोपी शिव ट्रेडर्स फर्म का संचालक बताया गया है। पुलिस ने उसे सिरमौर स्थित मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय में पेश कर ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया, जिसके बाद उसे महासमुंद लाया गया। अब उसे न्यायिक रिमांड के लिए संबंधित न्यायालय में पेश किए जाने की प्रक्रिया बताई गई है।
फर्जी बिलिंग और ट्रांजिट पास के इस्तेमाल का आरोप
पुलिस की विवेचना के अनुसार, सतपाल सिंह ने अपनी फर्म शिव ट्रेडर्स के माध्यम से अखिलेश सिंघल, पारितोष मिश्रा, मनीष अग्रवाल, संजय छाबड़िया और अन्य लोगों के साथ कथित रूप से आपराधिक षड्यंत्र किया।
जांच में आरोप है कि वास्तविक खैर लकड़ी की आपूर्ति के बिना विभिन्न फर्मों के नाम पर फर्जी बिल तैयार किए गए। इन बिलों को वैध दिखाने के लिए वन विभाग के फर्जी ट्रांजिट पास तैयार करने और एचएसएन कोड के दुरुपयोग का भी आरोप है।
पुलिस के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के बैंक खातों के लेन-देन की जांच में करोड़ों रुपये के कई भुगतान सामने आए हैं। इन लेन-देन और कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।
जुलाई में दर्ज हुआ था मामला
इस प्रकरण की शुरुआत वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा की शिकायत के बाद हुई। शिकायत में 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।
इस आधार पर थाना पिथौरा में 9 जुलाई 2026 को अपराध दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम, 1927 की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
महासमुंद पुलिस इस मामले में इससे पहले 14 सितंबर 2026 को पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल को गिरफ्तार कर चुकी है। पारितोष मिश्रा को पीयूष इंटरप्राइजेस और अखिलेश सिंघल को सिंघल इंटरप्राइजेस से जुड़ा बताया गया है।
पुलिस अब कथित गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी बिलिंग नेटवर्क, बैंक खातों में हुए लेन-देन और अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की जांच कर रही है।
अवैध कमाई की कुर्की की तैयारी
पुलिस के मुताबिक, अपराध से अर्जित नकदी की कुर्की और आरोपियों को कथित अवैध आर्थिक लाभ से वंचित करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
महासमुंद पुलिस के अनुसार, वन संपदा की कथित तस्करी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और अंतरराज्यीय वित्तीय लेन-देन से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज
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