स्टेट रिपोर्टर संतन दास मानिकपुरी
हमर प्रदेश CG न्यूज
*ग्राम में झूठे लोगों का बोलबाला, पुलिस की कार्यप्रणाली संदिग्ध!*
गरियाबंद
ग्रापं फुलझर विकासखंड छुरा में दो पक्षों में लड़ाई धर्म_अधर्म की लड़ाई बन गया है। आवेदक डीहु राम साहू ने 30 जनवरी 2026 को स्थानीय थाना और तहसीलदार सहित जिला कलेक्टर को अपने 40 सालों से काबिज जमीन पर मंदिर निर्माण की सूचना दी। ग्रामवासियों का पक्ष सकारात्मक रहा मगर ग्राम पटेल तारण ध्रुव ने सरपंच के ऊपर छोड़ दिया मगर सरपंच ने कभी सभा इस विषय में आहूत ही नहीं किया और उल्टा विरोधियों के साथ षडयंत्र में शामिल हो गया। हल्का पटवारी मीरा टंडन स्थल जांच में आये तो सरपंच ने हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया तभी उनका प्रतिक्रिया मंदिर निर्माण को लेकर सामने आया। 2 महीने बाद आवेदक व ग्राम का मुखिया डिहु राम साहू के साथ जानलेवा हमला सहित कई फर्जी कार्रवाई थाना फिंगेश्वर द्वारा किया जाता है। हालांकि प्राप्त दस्तावेज से ज्ञात हुआ है कि अपराधियों और गवाहों ने माननीय न्यायालय के समक्ष स्वीकारोक्ति है कि साहू परिवार के साथ जानलेवा हमला हुआ है। जिसमें नया तथ्य भी सामने आया है जिस शासकीय जमीन पर साहू परिवार मंदिर निर्माण करना चाह रहा था उस जमीन को ललेशरु ध्रुव को प्रमाणित किया है जिसमें मानिक यादव व कुशाल गिरी के हस्ताक्षर है। अब सवाल उठता है जिस जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद है उनको लेकर सरपंच को जल्दी क्यों है? आवेदक ने स्पष्ट कहा कि सरपंच चाहता तो विवाद ही नहीं होता। उसे ग्राम विकास और धार्मिक कार्यक्रमों में रुचि नहीं है। चोरी चुपके किसी दूसरे के जमीन को अन्य के नाम पर प्रमाणित करना अपराधियों को सह देना और बैर की दुर्भावना को बढ़ाना है। उन्हें भविष्य के लिए शासकीय जमीन को सुरक्षित करना चाहिए मगर वह अवैद्य अतिक्रमण को बढ़ावा दे रहा है जो सर्वथा अनुचित है।
*सरपंच की भी फर्जी गवाही*
फुलझर फर्जी SC ST कांड में यह बात दिलचस्प है कि घटना दिनांकित को सरपंच संतोष दिवान मौजूद ही नहीं था और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया है। माननीय व्यवहार न्यायालय राजिम से प्राप्त दस्तावेज से इनकी पुष्टि हो चुका है। अब जरा सोचिए जिस गाँव का मुखिया अथवा सरपंच झूठ में संलिप्त हो उस ग्राम का क्या होगा,भगवान ही मालिक है।
*कथन*
मैं स्थल निरीक्षण कर तहसीलदार साहब को भेज दी हूँ । निर्णय वही करेंगें।
*_हल्का पटवारी मीरा टंडन।*
ग्राम पंचायत के सरपंच संतोष दिवान का पक्ष जानने 4 से 5 बार कॉल किया तो उन्होनें फोन काट दिया।
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