Tuesday, October 27 2026
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छत को बिजलीघर बनाकर उपभोक्ता बन रहे ‘ऊर्जादाता’, छत्तीसगढ़ में तेज हो रही सौर क्रांति

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छत को बिजलीघर बनाकर उपभोक्ता बन रहे ‘ऊर्जादाता’, छत्तीसगढ़ में तेज हो रही सौर क्रांति

✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार

PM सूर्यघर योजना से मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सोलर से जोड़ने का लक्ष्य, 95 हजार घरों में पहुंची सौर ऊर्जा

रायपुर। कभी हर महीने आने वाला बिजली बिल परिवारों के बजट की चिंता बढ़ाता था, लेकिन अब छत्तीसगढ़ में तस्वीर बदल रही है। प्रदेश के हजारों घरों की छतों पर लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी को बिजली में बदल रहे हैं। कल तक बिजली के उपभोक्ता रहे परिवार अब खुद ‘ऊर्जादाता’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 

सूरज की रोशनी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

 

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना और परिवारों के बिजली खर्च को कम करना है। पात्र परिवारों को योजना के तहत हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिलने की व्यवस्था है।

 

केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी से रूफटॉप सोलर प्लांट लगाना पहले की तुलना में अधिक किफायती हुआ है। योजना की खासियत यह है कि नागरिक केवल सरकारी सहायता के लाभार्थी नहीं रहते, बल्कि ऊर्जा उत्पादन में भागीदार भी बनते हैं।

 

राज्य सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में अब तक करीब 95 हजार घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। वहीं, योजना के लिए 1.80 लाख से अधिक आवेदन CSPDCL को प्राप्त हो चुके हैं। राज्य सरकार ने मार्च 2027 तक 5 लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

 

ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर सरकार का जोर

 

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को गांव, किसान और आम परिवारों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का प्रयास है कि सौर ऊर्जा का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के परिवार भी इसका लाभ उठाएं।

 

योजना से परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।

 

केंद्र के साथ राज्य की अतिरिक्त सब्सिडी

 

छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की सब्सिडी के अलावा राज्य सरकार की अतिरिक्त सब्सिडी का भी लाभ मिल रहा है।

 

- 1 किलोवाट के सोलर प्लांट पर केंद्र की ओर से ₹30 हजार और राज्य की ओर से ₹15 हजार की सब्सिडी, यानी कुल ₹45 हजार तक का लाभ।

- 2 किलोवाट पर केंद्र से ₹60 हजार और राज्य से ₹30 हजार, यानी कुल ₹90 हजार तक की सब्सिडी।

- 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर केंद्र की अधिकतम ₹78 हजार और राज्य की ₹30 हजार सब्सिडी मिलाकर कुल ₹1.08 लाख तक का लाभ मिल सकता है।

 

इसके अलावा बैंक ऋण और आसान EMI जैसी सुविधाएं भी सोलर प्लांट लगाने की शुरुआती लागत को वहन करने में मददगार हो सकती हैं।

 

बिजली बिल शून्य होने से बदली सोच

 

गरियाबंद सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में योजना से जुड़े उपभोक्ताओं के अनुभव बताते हैं कि रूफटॉप सोलर घरेलू अर्थव्यवस्था में भी बदलाव ला रहा है। कई परिवारों का बिजली बिल काफी कम हुआ है और कुछ मामलों में यह लगभग शून्य तक पहुंच गया है।

 

बिजली बिल में होने वाली बचत का उपयोग परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए कर सकते हैं। ऐसे में घर की छत पर लगा सोलर पैनल केवल बिजली उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि परिवार के बजट को मजबूत करने का माध्यम भी बन रहा है।

 

सक्ती के किसान राजकुमार मनहर की प्रेरक कहानी

 

सक्ती जिले के ग्राम जर्वे के किसान राजकुमार मनहर रूफटॉप सोलर के लाभ का उदाहरण हैं। उन्होंने जून 2025 में अपने घर की छत पर 2 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाया। इसकी लागत करीब ₹1.26 लाख बताई गई है।

 

उन्हें केंद्र सरकार से ₹60 हजार की सब्सिडी मिल चुकी है, जबकि राज्य सरकार की ओर से ₹30 हजार की सब्सिडी मिलने की प्रक्रिया जारी है।

 

राजकुमार के अनुसार, सोलर पैनल लगने से पहले उनका बिजली बिल करीब ₹300 से ₹400 प्रतिमाह आता था, जो अब शून्य हो गया है। उन्होंने योजना को किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि सौर ऊर्जा ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।

 

उपभोक्ता से ‘ऊर्जादाता’ बनने का अवसर

 

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार बिजली का उत्पादन करने के साथ अतिरिक्त बिजली को नेट मीटरिंग के माध्यम से ग्रिड में भेज सकता है। इससे उपभोक्ता केवल बिजली इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति नहीं रहता, बल्कि ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया का भागीदार बन जाता है।

 

यही बदलाव ‘उपभोक्ता’ और ‘ऊर्जादाता’ के बीच की दूरी को कम करता है। हजारों घरों की छतों पर सोलर पैनल लगने से आने वाले समय में प्रदेश में विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकता है।

 

गांव से शहर तक सौर ऊर्जा का विस्तार

 

छत्तीसगढ़ में योजना का क्रियान्वयन CSPDCL के माध्यम से किया जा रहा है। योजना से जुड़ी पंजीयन और आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही है।

 

उपभोक्ता प्रधानमंत्री सूर्यघर पोर्टल, मोबाइल ऐप, CSPDCL की वेबसाइट, मोर बिजली ऐप और टोल-फ्री नंबर 1912 के माध्यम से योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। पंजीकृत वेंडर्स के माध्यम से स्थापित सोलर सिस्टम पर पांच वर्ष की व्यापक रखरखाव सेवा का प्रावधान भी बताया गया है।

 

5 लाख घरों का लक्ष्य, सौर ऊर्जा को नई रफ्तार

 

मार्च 2027 तक 5 लाख घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में रूफटॉप सोलर के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है। करीब 95 हजार घरों का पहले ही सौर ऊर्जा से जुड़ना और 1.80 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त होना इस योजना के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।

 

यदि सौर ऊर्जा के विस्तार की यह गति आगे भी जारी रहती है तो आने वाले समय में प्रदेश की लाखों छतें छोटे-छोटे बिजली उत्पादन केंद्र के रूप में नजर आ सकती हैं।

 

बचत, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का संगम

 

किसी भी सरकारी योजना की सफलता तब दिखाई देती है, जब उसका असर आम लोगों के जीवन में नजर आए। पीएम सूर्यघर योजना बिजली खर्च में राहत, स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता—इन तीनों पहलुओं को एक साथ जोड़ती है।

 

घर की छत पर लगा सोलर पैनल अब केवल बिजली पैदा करने का उपकरण नहीं रह गया है। यह परिवारों के लिए बचत, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद बन रहा है। कल तक बिजली खरीदने वाले परिवार अब बिजली पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और यही बदलाव छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा की नई तस्वीर तैयार कर रहा है।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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