✍ किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर हमर प्रदेश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दिवंगत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य पहले से शासकीय सेवा में कार्यरत है, तो परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की अदालत ने पुलिस विभाग के दिवंगत अधिकारी के बेटे आदित्य चौहान की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की मांग की थी, लेकिन परिवार के एक अन्य सदस्य के पहले से सरकारी सेवा में होने के कारण नियुक्ति के नियमों के तहत पात्रता पर सवाल था।
कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आई आर्थिक कठिनाई से राहत देना है। यह किसी व्यक्ति का सामान्य या वंशानुगत रोजगार का अधिकार नहीं है। यदि लागू नीति में किसी परिस्थिति को स्पष्ट रूप से अयोग्यता माना गया है, तो केवल आर्थिक निर्भरता या पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देकर उस नियम से छूट नहीं दी जा सकती।
मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि दिवंगत कर्मचारी की दूसरी पत्नी पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है। ऐसे में परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग को नियमों के अनुरूप नहीं माना गया।
हाई कोर्ट के इस फैसले से अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में सरकारी सेवा में पहले से कार्यरत परिवार के सदस्य की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है। कोर्ट ने नियमों की बाध्यता को प्राथमिकता देते हुए याचिका खारिज कर दी।
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