थाली में स्वाद के साथ सेहत की गारंटी: SECR का बड़ा एक्शन, 400 से ज्यादा ट्रेनों, स्टेशनों और बेस किचन की रसोई में पहुंची जांच टीम
बिलासपुर।
ट्रेन के सफर में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और उसकी शुद्धता को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने कड़ा रुख अपनाया है। यात्रियों को घर जैसा साफ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले, इस संकल्प के साथ रेलवे प्रशासन ने बिलासपुर, रायपुर और नागपुर—तीनों रेल मंडलों में 15 दिनों का एक धुआंधार ‘खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता महा-अभियान’ चलाकर रेलवे की पूरी खानपान व्यवस्था को कस दिया है।

21 अगस्त से 4 सितंबर: रसोई से लेकर चलती ट्रेनों तक ताबड़तोड़ मुआयना
मुख्यालय और मंडल स्तर के आला अधिकारियों की सीधी निगरानी में चले इस अभियान के तहत जांच टीमों ने कहीं भी ढिलाई नहीं बरती। आंकड़े बताते हैं कि कार्रवाई कितनी व्यापक थी:
* 311 स्टेशन खानपान इकाइयां: स्टेशनों पर सजे स्टॉल्स, रिफ्रेशमेंट रूम्स और कैंटीनों की बारीकी से जांच हुई।
* 77 चलती ट्रेनों की पेंट्री कार: रफ्तार भरती ट्रेनों में सीधे ऑन-बोर्ड जाकर खाना पकाने के तौर-तरीकों का जायजा लिया गया।
* 14 बेस किचन: जहां हजारों यात्रियों के लिए एक साथ खाना तैयार होता है, उन सभी प्रमुख बेस किचनों की स्वच्छता और भंडारण प्रणाली की गहन पड़ताल की गई।

FSSAI के मानकों पर हुई कड़ी परख: केवल खाना नहीं, हाइजीन भी जरूरी
जांच का मुख्य फोकस भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और रेलवे के कड़े दिशा-निर्देशों पर रहा। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं को परखा:
* भोजन बनाने में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री की ताजगी और उसकी शेल्फ-लाइफ।
* खाना पकाने वाले शेफ और वेंडर्स की व्यक्तिगत स्वच्छता—दस्ताने (ग्लोव्स), एप्रन और सिर पर कैप का अनिवार्य उपयोग।
* पेंट्री और किचनों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तथा कचरे का वैज्ञानिक व तुरंत निस्तारण।
* बर्तनों और खाना परोसने वाले काउंटरों की नियमित सैनिटाइजेशन प्रक्रिया।
वेंडरों को अल्टीमेटम: 'यात्री की सेहत से समझौता बर्दाश्त नहीं'
अधिकारियों ने केवल जांच ही नहीं की, बल्कि खानपान से जुड़े कर्मचारियों और वेंडर्स को सीधे तौर पर संवेदनशील भी बनाया। उन्हें स्पष्ट हिदायत दी गई कि मुनाफा कमाने की होड़ में गुणवत्ता और साफ-सफाई से रत्ती भर भी समझौता नहीं होना चाहिए। लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
रेलवे प्रशासन का साफ संदेश है कि यह अभियान महज 15 दिनों की औपचारिकता नहीं था, बल्कि यात्रियों के विश्वास को मजबूत करने की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, ताकि सफर के दौरान मुसाफिर बेफिक्र होकर लजीज और सेहतमंद खानपान का आनंद ले सकें।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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