✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
दुर्ग। गणेशोत्सव से पहले गणेश प्रतिमा विक्रेताओं और पंडाल समितियों पर नगर निगम एवं जिला प्रशासन द्वारा शुल्क लगाए जाने तथा वर्षों पुराने स्थान से दुकानदारों को हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा।
विहिप पदाधिकारियों ने शुल्क लगाए जाने के फैसले को लेकर नाराजगी जताई और इसे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया। संगठन के अनुसार, हिंदी भवन से पटेल चौक तक पिछले करीब 100 वर्षों से गरीब परिवार परंपरागत रूप से गणेश प्रतिमाओं की बिक्री कर अपनी आजीविका चलाते आ रहे हैं। संगठन का आरोप है कि अब इन विक्रेताओं को उनके पुराने स्थान से विस्थापित किया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
अतिरिक्त शुल्क का भी विरोध
विहिप और बजरंग दल ने गणेश उत्सव समितियों एवं प्रतिमा विक्रेताओं से लिए जा रहे अतिरिक्त शुल्क पर भी आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि छोटे व्यापारियों और आयोजकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालने से उनकी परेशानियां बढ़ेंगी और कई लोग कर्ज के बोझ में आ सकते हैं।
प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी
विहिप जिला मंत्री रामलोचन तिवारी एवं युवराज शर्मा ने कहा कि यदि प्रशासन ने प्रतिमा विक्रेताओं को उनके परंपरागत स्थान पर दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी और इससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी।
संगठन की प्रमुख मांगें
विहिप एवं बजरंग दल ने प्रशासन से मांग की है कि गणेश प्रतिमा विक्रेताओं को उनके परंपरागत स्थान पर दुकान लगाने की अनुमति दी जाए तथा प्रतिमा विक्रेताओं एवं गणेश उत्सव समितियों पर लगाए गए शुल्क की समीक्षा कर अनुचित शुल्क को तत्काल वापस लिया जाए।
संगठन ने प्रशासन से गणेशोत्सव के दौरान छोटे व्यापारियों और उत्सव समितियों की समस्याओं का समाधान करते हुए उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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