Monday, October 26 2026
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नीट की ओएमआर शीट में गड़बड़ी का दावा पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका की खारिज; 159 अंक सही

abhishek@hamarpradeshcg
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नीट की ओएमआर शीट में गड़बड़ी का दावा पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका की खारिज; 159 अंक सही

स्टेट रिपोर्टर अभिषेक कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट 

 

बिलासपुर। नीट परीक्षा की ओएमआर शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाकर हाईकोर्ट पहुंची छात्रा को राहत नहीं मिली। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मूल ओएमआर शीट की जांच के बाद छात्रा की याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने माना कि छात्रा को मिले 159 अंक सही हैं और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा किया गया मूल्यांकन मूल ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों के आधार पर ही किया गया है।

 

मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ की 21 वर्षीय पीहू सिंह से जुड़ा है। पीहू ने 21 जून 2026 को नीट-स्नातक परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद उन्हें 159 अंक मिले। छात्रा ने ओएमआर शीट में गड़बड़ी की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। छात्रा का दावा था कि उसने इससे अधिक प्रश्न हल किए थे, लेकिन परिणाम में उसके अनुरूप अंक नहीं मिले।

 

कोर्ट ने मंगाई मूल ओएमआर शीट

 

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को छात्रा की मूल ओएमआर शीट अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया। इसके बाद 10 अगस्त को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के उप निदेशक अनिल धीमान ने मूल ओएमआर शीट कोर्ट में प्रस्तुत की।

 

अदालत ने ओएमआर शीट की जांच की तो तस्वीर साफ हो गई। कोर्ट ने पाया कि कुल 180 प्रश्नों में से छात्रा ने 71 प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट में दर्ज किए थे। इनमें 46 उत्तर सही और 25 उत्तर गलत पाए गए। इन दर्ज उत्तरों के आधार पर छात्रा को मिले 159 अंक सही पाए गए।

 

मूल ओएमआर ही माना जाएगा वास्तविक रिकॉर्ड

 

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा में अभ्यर्थी द्वारा दर्ज किए गए उत्तरों का वास्तविक और आधिकारिक रिकॉर्ड मूल ओएमआर शीट होती है। टेस्ट बुकलेट में दिए गए उत्तर या बाद में किया गया कोई दावा मूल ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों का विकल्प नहीं हो सकता।

 

अदालत ने यह भी कहा कि केवल यह कहना कि अभ्यर्थी ने अधिक प्रश्न हल किए थे, अपने आप में ओएमआर शीट में दर्ज उत्तरों को बदलने का आधार नहीं बन सकता। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी ने ओएमआर शीट पर जो उत्तर अंकित किए हैं, मूल्यांकन उसी के आधार पर किया जाता है।

 

जांच के बाद याचिका खारिज

 

मूल ओएमआर शीट की जांच में छात्रा के दावे की पुष्टि नहीं हुई। अदालत ने पाया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा जारी परिणाम में छात्रा को दिए गए 159 अंक सही हैं और मूल्यांकन में किसी तरह की गड़बड़ी सामने नहीं आई।

 

मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और मूल ओएमआर शीट के परीक्षण के बाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया। इसके साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया।

 

 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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