अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर
न्यायधानी में 'सफेदपोश' लापरवाही: जिला अस्पताल में गलत ऑपरेशन से जिंदगी-मौत से जूझ रही प्रसूता, कलेक्टर के चौखट पर पहुंचा पीड़ित पति
बिलासपुर:
न्यायधानी की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर वेंटिलेटर पर है, इसका एक और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने एक नवजात की मां को मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। तखतपुर निवासी पीड़ित पति पवन देवांगन ने कलेक्टर से लिखित गुहार लगाकर दोषी महिला डॉक्टर के.के. मित्तल का लाइसेंस रद्द करने और लापरवाह अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
ऑपरेशन में गड़बड़ी और जबरन डिस्चार्ज का आरोप
शिकायत के अनुसार, पवन देवांगन ने 27 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर अपनी पत्नी ज्योति देवांगन को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। सुरक्षित प्रसव के बाद बच्चे का जन्म तो हुआ, लेकिन आरोप है कि डॉक्टर के.के. मित्तल द्वारा किए गए गलत ऑपरेशन और घोर चिकित्सीय लापरवाही के चलते ज्योति की हालत लगातार बिगड़ने लगी।
परिजनों का आरोप है कि सुधार होने के बजाय जब महिला की तबीयत बिगड़ने लगी, तो अस्पताल प्रबंधन ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए महज़ 3 दिन बाद ही जबरन दबाव बनाकर मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। घर पहुंचते ही हालत नाजुक होने पर आनन-फानन में प्रसूता को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
'मंगलसूत्र गिरवी' और दावों की खोखली हकीकत
यह मामला सिर्फ एक ज्योति का नहीं है; सिम्स और जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों के साथ बदसलूकी और लापरवाही आम बात बन चुकी है। सरकार चाहे 'मुफ्त इलाज' और स्वास्थ्य योजनाओं के कितने भी कसीदे पढ़ ले, हकीकत यह है कि आम जनता को जान बचाने के लिए जमीन-जायदाद, गहने और मंगलसूत्र तक गिरवी रखने पड़ रहे हैं। सरकारी में लापरवाही और प्राइवेट में लूट—मरीज जाएं तो जाएं कहां?
जनता को अब 'गब्बर' और 'थलापति' की जरूरत!
अस्पतालों की इस मनमानी और असंवेदनशीलता से त्रस्त जनता में अब भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब कागजी जांच से बात नहीं बनने वाली; व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जमीनी स्तर पर तमिलनाडु की तर्ज पर सख्त स्वास्थ्य मॉडल और अस्पतालों की लूट-लापरवाही पर लगाम कसने के लिए सिनेमाई 'गब्बर' जैसे सख्त एक्शन की सख्त जरूरत है, ताकि सफेद एप्रन की आड़ में खिलवाड़ करने वालों को कड़ा सबक मिल सके।
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