पहरे में आस्था: धारा-144 के साये में बिलासपुर का सबसे बड़ा कृष्ण जन्मोत्सव; मटकी फोड़, शोभायात्रा और मलखंभ पर सस्पेंस बरकरार!
दो पक्षों के विवाद के बाद सिटी कोतवाली इलाके में लगी है धारा-144; आयोजक अनुमतियों के इंतज़ार में, उधर मंदिरों में गूंज रही घंटियां और तैयार हो रहा 100 किलो का महाप्रसाद
सिटी रिपोर्टर | बिलासपुर

न्यायधानी बिलासपुर में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व उल्लास के साथ-साथ भारी असमंजस और सुरक्षा पहरे के बीच मनाया जा रहा है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हाल ही में दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद लागू की गई धारा-144 ने शहर के सबसे बड़े पारंपरिक आयोजनों पर संशय के बादल खड़े कर दिए हैं।
घोंघा बाबा मंदिर का मध्यरात्रि जन्मोत्सव हो, गोल बाजार की ऐतिहासिक मटकी फोड़ स्पर्धा हो, करोना चौक की मलखंभ प्रतियोगिता या फिर यादव समाज की पारंपरिक भव्य शोभायात्रा—सभी बड़े आयोजनों का भविष्य अब प्रशासनिक अनुमति की टेबल पर टिका हुआ है।
58 साल पुरानी परंपराओं पर संकट, समितियां पत्राचार में उलझीं
आयोजन समितियों ने सुरक्षा बंदोबस्त और कार्यक्रम की विधिवत अनुमति के लिए एसडीएम व पुलिस प्रशासन को पत्र लिखा है, लेकिन अब तक औपचारिक हरी झंडी नहीं मिली है।
* 58 साल पुरानी मटकी फोड़: गोल बाजार में लगभग 58 वर्षों से 50 फीट ऊंची मटकी फोड़ प्रतियोगिता आयोजित हो रही है। इस बार परंपरा टूटने का डर सता रहा है।
* मलखंभ और स्पर्धाएं: करोना चौक युवा मंच की मलखंभ स्पर्धा की तैयारियां पूरी हैं, लेकिन मंजूरी का इंतजार है।
* राधा-कृष्ण सजाओ स्पर्धा रद्द: घोंघा बाबा मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है, पर सुरक्षा कारणों से इस वर्ष 'राधा-कृष्ण सजाओ' प्रतियोगिता आयोजित नहीं की जाएगी।
* यादव समाज की शोभायात्रा: लखीराम ऑडिटोरियम से निकलने वाली पारंपरिक शोभायात्रा में 60 महिलाओं का करमा नृत्य और दुकालू यादव व टीम की प्रस्तुतियां तय हैं, लेकिन यह मार्ग भी धारा-144 के दायरे में आता है।
व्यंकटेश मंदिर में आस्था का ठाठ: झूला उत्सव और 100 किलो पंजीरी तैयार
प्रशासनिक पचड़ों से इतर मंदिरों के भीतर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। व्यंकटेश मंदिर में नागपंचमी से जारी झूला उत्सव अपने शिखर पर है, जहां भगवान प्रतिदिन अलग-अलग रूपों में दर्शन दे रहे हैं।
* प्रातः अभिषेक व झांकियां: जन्माष्टमी पर सुबह 5 बजे शास्त्रीय संगीत के बीच भगवान का विशेष अभिषेक होगा। मंदिर परिसर में तीन नयनाभिराम झांकियां सजाई गई हैं।
* महाप्रसाद: मंदिर के 30 विद्यार्थियों ने मिलकर 100 किलो विशेष पंजीरी का प्रसाद तैयार किया है, जिसे मध्यरात्रि जन्मोत्सव के बाद बांटा जाएगा।
* महंत डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने बताया कि पुलिस-प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था हेतु पत्र भेजा गया है और वे शांतिपूर्ण ढंग से जन्मोत्सव मनाने की तैयारी में जुटे हैं।
ज्योतिषीय गणना: इस बार 5 दुर्लभ शुभ संयोगों की महायुति
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी बेहद खास रहने वाली है। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों का अनूठा मेल बन रहा है:
* अष्टमी तिथि: पूरे पर्व का आधार बनेगी।
* रोहिणी नक्षत्र: रात 11:04 बजे तक विद्यमान रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र लगेगा।
* हर्षण योग: दिनभर मांगलिक व शुभ कार्यों के लिए अनुकूलता प्रदान करेगा।
* वृष राशि का चंद्रमा: भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य लग्न से जुड़ा दुर्लभ संयोग।
* मध्यरात्रि जन्मोत्सव: परंपरागत मान्यता के अनुसार कान्हा के प्राकट्य की वेला कल्याणकारी मानी गई है।
शांति समिति की बैठक और थानों की रिपोर्ट पर टिकेगा अंतिम फैसला
> "शांति समिति की बैठक बुलाई गई है और थानों से ज़मीनी रिपोर्ट मांगी गई है। बैठक और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की अनुमति का निर्णय लिया जाएगा। यदि अनुमति दी जाती है, तो सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी समाज व संबंधित संगठन की भी तय होगी।"
> — रजनेश सिंह, एसएसपी, बिलासपुर
अब शहर की निगाहें पुलिस-प्रशासन की बैठक पर टिकी हैं कि क्या बिलासपुर की 58 साल पुरानी परंपराएं शर्तों के साथ बहाल होंगी या इस बार कान्हा का जन्मोत्सव केवल मंदिर की चारदीवारियों के भीतर ही सिमट कर रह जाएगा।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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