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बलराम जयंती पर किसान दिवस में गूंजा आत्मनिर्भर खेती का संदेश

hetram@hamarpradeshcg
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Chhattishgarh local news
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✍️हेतराम साहू स्टेट- रिपोर्टर

हमर प्रदेश छत्तीसगढ़

 

बलराम जयंती पर किसान दिवस में गूंजा आत्मनिर्भर खेती का संदेश

 

120 किसानों ने लिया हिस्सा, वैज्ञानिक कृषि तकनीक और आय बढ़ाने के उपायों पर हुआ मंथन

 

महासमुंद, 16 सितंबर 2026। कृषि के देवता भगवान श्री बलराम की जयंती के अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र भलेसर, महासमुंद में एक दिवसीय जिला स्तरीय किसान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे करीब 120 किसानों ने सहभागिता की। आयोजन में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ कृषि आधारित अन्य गतिविधियों को अपनाकर आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा भगवान श्री बलराम की पूजा-अर्चना के साथ हुई। मुख्य अतिथि जनपद पंचायत महासमुंद की अध्यक्ष श्रीमती दिशा दीवान तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत महासमुंद के उपाध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष श्री कुबेर गिरी गोस्वामी, जिला उपाध्यक्ष श्री बृजलाल साव, जिला प्रमुख बीज आयाम श्री संजय चन्द्राकर, ब्लॉक अध्यक्ष महासमुंद श्री शत्रुघन साहू, जिला कार्यालय प्रमुख श्री राजेन्द्र वैष्णव एवं सरपंच भलेसर श्री सेवाराम कुर्रे सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।

 

खेती के साथ आय के नए रास्ते अपनाने पर जोर

 

मुख्य अतिथि श्रीमती दिशा दीवान ने कहा कि वर्तमान समय में केवल फसल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। किसानों को अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्यमों को भी अपनाना चाहिए। उन्होंने किसानों से उपलब्ध संसाधनों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने का आह्वान किया।

 

कृषि विज्ञान केन्द्र भलेसर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. शर्मा ने किसानों को दलहन-तिलहन की उपयोगिता, मृदा स्वास्थ्य, उन्नत कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण तथा कृषि की मौजूदा समस्याओं के समाधान की जानकारी दी। उन्होंने कृषि के साथ आय के विभिन्न स्रोत विकसित करने पर भी विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

 

दलहन का रकबा बढ़ाने पर विशेष फोकस

 

उप संचालक कृषि श्री फागूराम कश्यप ने आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत दलहन एवं तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य देश में दलहन उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना है।

 

उन्होंने बताया कि महासमुंद जिले में पिछले वर्ष खरीफ सीजन में 8,901 हेक्टेयर तथा रबी सीजन में 6,423 हेक्टेयर में दलहन की खेती की गई थी। खरीफ 2026 के लिए जिले में 9,120 हेक्टेयर दलहन क्षेत्र का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

किसानों ने विशेषज्ञों से पूछे सवाल, मिला तकनीकी समाधान

 

किसान दिवस के दौरान प्रश्नोत्तरी एवं संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी समस्याएं कृषि विशेषज्ञों के सामने रखीं, जिनका विशेषज्ञों ने तकनीकी समाधान और आवश्यक सुझाव दिए। कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से किसानों से वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा उपलब्ध तकनीकों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की गई।

 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. साकेत दुबे, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यानिकी) ने किया। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ जिला महासमुंद के सदस्य, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

 

किसानों को बांटे गए 500 फलदार पौधे

 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर किसानों को करीब 500 फलदार पौधों का वितरण किया गया। इनमें नींबू, आंवला, आम, जामुन, कटहल, बेल सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे शामिल थे। किसानों को फलदार पौधों के माध्यम से खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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