बस्तर दशहरा रथ परिक्रमा के दौरान
हमर प्रदेश सीजी न्यूज़
स्टेट हेड रिपोर्टर- मनोज कुमार भट्ट
हादसा: कोपा कश्यप की मौत से कोया कुटमा समाज में गहरा दुख, मृतक परिवार को 1 करोड़ और प्रत्येक घायल को 50-50 लाख रुपये मुआवजा दे सरकार : राजू सोढ़ी
विशाल रथ की परिक्रमा के दौरान हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए गंभीर सवाल—परंपरा की रक्षा के साथ आदिवासियों की जान की सुरक्षा भी जरूरी
जगदलपुर। बस्तर दशहरा रथ परिक्रमा के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में सुरगुड़ा निवासी कोपा कश्यप (बेड़ता), पिता बगन कश्यप (बेड़ता), की रथ के पहिए की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं, रथ खींच रहे अन्य लोग भी हादसे का शिकार हुए। कुछ लोगों के पैरों में गंभीर चोटें आने और अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इस घटना से पूरे कोया कुटमा समाज में गहरा दुख व्याप्त है।
जनपद सदस्य राजू सोढ़ी ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतक के परिवार के प्रति संवेदना जताई और राज्य सरकार से मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये तथा प्रत्येक घायल को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा बस्तर की ऐतिहासिक पहचान, आदिवासी संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है। सदियों से आदिवासी एवं मूलनिवासी समाज के लोग अपने श्रम, समर्पण और आस्था से इस ऐतिहासिक परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। लेकिन इसी परंपरा को निभाने के दौरान किसी व्यक्ति की जान चली जाए और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाएं, तो दशहरा समिति, जिला प्रशासन और शासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
रथ परिक्रमा के दौरान हादसा कैसे हुआ? सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
राजू सोढ़ी ने कहा कि यह केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे कोया कुटमा समाज और बस्तर के लिए अत्यंत दुखद घटना है। जो आदिवासी समाज अपनी परंपरा और आस्था को जीवित रखने के लिए पूरी श्रद्धा से रथ खींचता है, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन और दशहरा समिति के अध्यक्ष जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, तो इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे हुई? क्या भीड़ नियंत्रण, रथ संचालन, सुरक्षित दूरी और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? इन सवालों पर दशहरा समिति और जिला प्रशासन को जवाब देना चाहिए।
मृतक परिवार को 1 करोड़ और प्रत्येक घायल को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग
सोढ़ी ने राज्य सरकार से मांग की है कि बस्तर दशहरा रथ परिक्रमा के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले कोपा कश्यप (बेड़ता) के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही, हादसे में घायल प्रत्येक व्यक्ति को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए। घायलों के बेहतर इलाज की पूरी व्यवस्था की जाए और मृतक के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल संवेदना व्यक्त करके अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती। हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए। जांच का उद्देश्य केवल घटना के कारणों का पता लगाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी होना चाहिए।
बस्तर दशहरा समिति और जिला प्रशासन से सवाल—क्या परंपरा के नाम पर आदिवासियों की जान जोखिम में डालना जरूरी है?
सोढ़ी ने कहा कि बस्तर दशहरा की परंपरा का संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इसमें भाग लेने वाले लोगों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि विशाल रथ के निर्माण में हर वर्ष बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता होती है। ऐसे में रथ निर्माण की प्रक्रिया, लकड़ी की खपत और रथ के आकार को लेकर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। बस्तर की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि छोटे रथ के विकल्प पर विचार करके परंपरा को सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं, तो विशाल रथ के आकार और उसकी अनिवार्यता की समीक्षा क्यों नहीं की जानी चाहिए?
सोढ़ी ने सुझाव दिया कि दशहरा समिति, जिला प्रशासन, परंपरा के जानकारों, सुरक्षा विशेषज्ञों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाए। इस बैठक में रथ के आकार, निर्माण में लगने वाली लकड़ी, रथ खींचने की प्रक्रिया, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के व्यावहारिक विकल्पों पर चर्चा होनी चाहिए। परंपरा से जुड़े लोगों की सहमति और सुरक्षा विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर आवश्यक निर्णय लिए जाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा उद्देश्य बस्तर दशहरा की परंपरा का विरोध करना नहीं, बल्कि इसे सुरक्षित, जिम्मेदार और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। बस्तर की पहचान उसके जल, जंगल, जमीन, आदिवासी समाज और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। इसलिए परंपरा के संरक्षण के साथ उसमें भाग लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
शासन-प्रशासन से प्रमुख मांगें-
1. बस्तर दशहरा रथ परिक्रमा के दौरान हादसे में मृतक कोपा कश्यप के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
2. प्रत्येक घायल को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
3. हादसे की निष्पक्ष जांच कराकर सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाए।
4. भविष्य में रथ खींचने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी भीड़ नियंत्रण, सुरक्षित दूरी, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
5. रथ के आकार, लकड़ी की खपत और रथ खींचने की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए दशहरा समिति, प्रशासन, परंपरा के जानकारों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाई जाए।
परंपरा भी बचे, आदिवासियों की जान भी सुरक्षित रहे
अंत में सोढ़ी ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी आस्था, अस्मिता और पुरखों की धरोहर का प्रतीक है, लेकिन इस परंपरा को निभाने वाले आदिवासियों की जिंदगी भी उतनी ही अनमोल है। कोपा कश्यप की मौत से पूरे कोया कुटमा समाज में गहरा दुख है। सरकार और प्रशासन को स्पष्ट करना होगा कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि हमारी मांग स्पष्ट है—मृतक परिवार को न्याय मिले, घायलों को उचित मुआवजा और बेहतर इलाज मिले, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो तथा बस्तर दशहरा की परंपरा को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए ठोस पहल की जाए। परंपरा की गरिमा तभी बनी रहेगी, जब उसे निभाने वाले लोगों के जीवन की भी पूरी कद्र की जाएगी।
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