हमर प्रदेश सीजी न्यूज़
स्टेट हेड रिपोर्टर- मनोज कुमार भट्ट
बस्तर में धर्मांतरण पर ग्रामसभा का सख्त फैसला, बाहरी पादरी-पादरियों के प्रवेश पर रोक
जगदलपुर/ बस्तर: बस्तर जिले में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के बड़े बोदल गांव में ग्रामसभा ने धर्मांतरण पर लगाम लगाने और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण को लेकर कड़ा फैसला लिया है।
गांव के अटल चौक पर लगा नो एंट्री बोर्ड
नानगुर ब्लॉक के बड़े बोदल गांव के मुख्य चौक अटल चौक पर ग्रामसभा ने एक सूचना बोर्ड लगाया है। इस बोर्ड पर बाहरी लोगों और बाहरी पादरी-पादरियों के प्रवेश और धार्मिक आयोजनों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
बोर्ड में लिखा है कि:
1. गांव में बाहरी सभाओं और धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन से पहले ग्रामसभा से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
2. बिना अनुमति के किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि और धर्म प्रचार पर रोक रहेगी।
परंपरा और सांस्कृतिक पहचान बचाने पर जोर*
ग्रामीणो का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य स्थानीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना है। गांव में बाहरी गतिविधियों से गांव की मूल संस्कृति प्रभावित हो रही थी, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
ग्रामसभा में मौजूद एक ग्रामीण ने कहा - गांव में प्रार्थना-दुआ के नाम पर और असंवैधानिक रूप से चर्च बनाने जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए हम लोगों ने यह कदम उठाया है। यह फैसला ग्रामसभा ने अभिव्यक्तियों से कोतवाल, पटेल, पुजारी, सरपंच, पंच और समस्त एथलीटों की अनुमोदन में पारित किया है।"
पेसा कानून का दिया गया हल
ग्रामसभा ने अपने इस फैसले के लिए पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी पेसा कानून 1996 का हल दिया है।
हालांकि इस फैसले की कानूनी कार्रवाई और इसके दायरे को लेकर अभी तक संबंधित अधिकारियों का कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। बस्तर में ग्रामसभा के इस फैसले पर अब चर्चा तेज हो गई है।
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