Friday, October 30 2026
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बाढ़ पीड़ितों को बांटने के बजाय निगम कार्यालय में खाद्य सामग्री सड़ाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, महापौर जनता को दें जवाब: राजेश चौधरी

State Head - MANOJ
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बाढ़ पीड़ितों को बांटने के बजाय निगम कार्यालय में खाद्य सामग्री सड़ाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, महापौर जनता को दें जवाब: राजेश चौधरी

बाढ़ पीड़ितों को बांटने के बजाय निगम कार्यालय में खाद्य सामग्री सड़ाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, महापौर जनता को दें जवाब: राजेश चौधरी

हमर प्रदेश सीजी न्यूज़ 

स्टेट हेड रिपोर्टर- मनोज कुमार भट्ट 

जगदलपुर, 28 अक्टूबर। नगर पालिक निगम जगदलपुर के नेता प्रतिपक्ष राजेश चौधरी ने बाढ़ पीड़ितों के लिए प्राप्त खाद्य सामग्री का समय पर वितरण नहीं होने और निगम कार्यालय में रखे-रखे उसके खराब होने के मामले को गंभीर बताते हुए महापौर से जवाब मांगा है।

राजेश चौधरी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिस खाद्य सामग्री का उपयोग बाढ़ से प्रभावित जरूरतमंद परिवारों की भूख मिटाने और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए किया जाना था, यदि वही सामग्री समय पर वितरित नहीं होने के कारण खराब हो रही है, तो यह नगर निगम की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान जगदलपुर और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में अनेक परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कई परिवारों के सामने भोजन की व्यवस्था करना तक चुनौती बन गया था। ऐसे संकट के समय जरूरतमंदों को राहत पहुंचाना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। लेकिन यदि यह सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय निगम कार्यालय में पड़ी-पड़ी खराब हो रही है, तो इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता।

नेता प्रतिपक्ष ने उठाए 5 बड़े सवाल:

1. जब बाढ़ पीड़ितों को भोजन की सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब सामग्री का वितरण क्यों नहीं किया गया?
2. क्या नगर निगम प्रशासन के पास वितरण की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं थी?
3. वितरण में देरी क्यों हुई?
4. यदि लापरवाही से सामग्री खराब हुई है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
5. महापौर को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

राजेश चौधरी ने कहा कि राहत सामग्री का उद्देश्य उसे एकत्रित कर कार्यालय में रखना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचाना होता है। आपदा के दौरान हर दिन महत्वपूर्ण होता है।

 

 

महापौर से की ये मांग:

- जनता को बताया जाए कि बाढ़ पीड़ितों के लिए कितनी मात्रा में खाद्य सामग्री प्राप्त हुई थी।
- यह सामग्री किस माध्यम से और किन उद्देश्यों के लिए आई थी।
- इसका वितरण किन वार्डों एवं प्रभावित क्षेत्रों में किया जाना था और अब तक कितना हुआ है।
- यदि सामग्री खराब हुई है तो उसकी मात्रा, वर्तमान स्थिति और खराब होने के कारण सार्वजनिक किए जाएं।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
- शेष उपयोग योग्य खाद्य सामग्री को तत्काल जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाया जाए।

अंत में उन्होंने कहा कि नगर निगम जनता के पैसों और जनहित से जुड़े संसाधनों का उपयोग करने वाली संस्था है, इसलिए इसकी प्रत्येक कार्रवाई में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता दिखनी चाहिए। बाढ़ पीड़ितों के नाम पर आई सामग्री की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाब और कार्रवाई चाहिए।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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