बीमारी बांटने वाला ‘केयर’? खुले मैदान में फेंकी एक्सपायरी दवाएं और जहरीला मेडिकल वेस्ट, श्रीराम केयर हॉस्पिटल पर नगर निगम का डंडा

बिलासपुर (मंगला / छपराभाठा): मरीजों को सेहतमंद करने का दावा करने वाले निजी अस्पताल खुद शहर में महामारी और संक्रमण का बीज बो रहे हैं। न्यायधानी बिलासपुर के मंगला स्थित छपराभाठा क्षेत्र में खुलेआम बायोमेडिकल वेस्ट और एक्सपायरी दवाओं को कचरे की तरह डंप करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस गंभीर लापरवाही के सीधे तार शहर के नामी श्रीराम केयर हॉस्पिटल से जुड़े मिले हैं। मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए नगर पालिक निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना ठोका गया है।
खुले मैदान में फैला था 'जहरीला कचरा': औचक निरीक्षण में खुली पोल

नगर निगम की टीम जब मंगला-छपराभाठा क्षेत्र में निरीक्षण पर निकली, तो सार्वजनिक जगह पर भारी मात्रा में लावारिस फेंका गया मेडिकल कचरा, इस्तेमाल की गई सामग्री और एक्सपायरी दवाएं बिखरी मिलीं।
सीधी लापरवाही उजागर: जब मौके पर मिले दस्तावेजों और मेडिकल कचरे के रैपर्स की जांच की गई, तो साबित हुआ कि यह जानलेवा कचरा श्रीराम केयर हॉस्पिटल का है।
नियमों की धज्जियां: बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत अस्पतालों का कचरा विशेष बैगों में सील कर अधिकृत एजेंसी (इंसीनेटर) को सौंपा जाना अनिवार्य है, लेकिन अस्पताल ने पैसे और झंझट बचाने के फेर में इसे सार्वजनिक जगह पर फेंकवा दिया।

जनस्वास्थ्य से खुला खिलवाड़, 30 हजार का जुर्माना और आखिरी चेतावनी
खुले में पड़ा मेडिकल वेस्ट न केवल भूजल और मिट्टी को दूषित करता है, बल्कि आवारा मवेशियों, कूड़ा बीनने वाले बच्चों और स्थानीय रहवासियों के लिए गंभीर संक्रामक बीमारियों (हेपेटाइटिस, एचआईवी और सेप्सिस) का खुला न्योता है।

निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए अस्पताल पर 30,000 रुपये का अर्थदंड लगाया और दो-टूक चेतावनी जारी की:
"शहर की स्वच्छता और नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में श्रीराम केयर हॉस्पिटल या किसी भी अन्य स्वास्थ्य संस्थान द्वारा दोबारा ऐसी हरकत पाई गई, तो केवल चालान नहीं काटा जाएगा, बल्कि अस्पताल का लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन रद्द करने के साथ सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।"
बड़ा सवाल: क्या 30 हजार का जुर्माना काफी है?
निगम की इस कार्रवाई के बाद बिलासपुर के निजी अस्पतालों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन आम नागरिकों के बीच यह सवाल सुलग रहा है कि करोड़ों का मुनाफा कमाने वाले बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों के लिए 30 हजार का जुर्माना क्या केवल 'ऊंट के मुंह में जीरा' नहीं है? जब तक जनस्वास्थ्य से खेलने वाले ऐसे अस्पतालों पर ताला लगाने जैसी सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बायो-वेस्ट का यह खतरनाक खेल रुकना नामुमकिन है।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
Comments (0)
Leave a Comment
No comments yet. Be the first to share your thoughts!