✍🏻 हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज़ ब्लॉक रिपोर्टर - आशीष यादव रतनपुर बिलासपुर छत्तीसगढ़
बेलगहना में ‘बाघ’ की दस्तक से दहशत!
सिद्ध बाबा आश्रम के आसपास बाघ देखे जाने के दावे, मवेशियों पर हमले और पंजों के निशान की चर्चा से ग्रामीण चिंतित
बेलगहना। जंगल और ग्रामीण इलाकों की सीमा से लगे बेलगहना क्षेत्र में इन दिनों एक कथित बाघ की मौजूदगी को लेकर लोगों के बीच चिंता और दहशत का माहौल बना हुआ है। सिद्ध बाबा आश्रम के आसपास बाघ देखे जाने के दावों, मवेशियों पर हमले तथा पंजों के निशान मिलने की चर्चाओं के बाद ग्रामीणों की नजर अब जंगल की हर हलचल पर टिकी हुई है।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में करीब दो वर्ष की उम्र के बाघ की मौजूदगी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल बाघ की मौजूदगी को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। यही वजह है कि वन विभाग और अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) की टीम मामले की वास्तविकता पता लगाने में जुटी हुई है।
3–4 दिन से कैमरा ट्रैप, फिर भी तस्वीर का इंतजार
बाघ की गतिविधियों का पता लगाने के लिए ATR की टीम ने क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए हैं। पिछले करीब तीन से चार दिनों से कैमरों के जरिए जंगल और आसपास के संभावित रास्तों पर निगरानी की जा रही है।
टीम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि जिस वन्यजीव को लेकर ग्रामीणों में चर्चा है, वह वास्तव में बाघ है या कोई अन्य वन्यजीव। इसके लिए संभावित आवाजाही वाले क्षेत्रों में कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।
लेकिन अब तक बाघ की स्पष्ट तस्वीर या निश्चित लोकेशन सामने नहीं आने से स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।
मवेशियों पर हमले के दावों ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीण क्षेत्र में मवेशियों पर हमले की घटनाओं और उनके पीछे बाघ होने की आशंका ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कुछ ग्रामीणों द्वारा पंजों के निशान देखे जाने का दावा भी किया जा रहा है।
हालांकि, इन निशानों और घटनाओं की पहचान एवं पुष्टि वन विभाग की जांच का विषय है। विशेषज्ञ जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निशान वास्तव में बाघ के हैं या किसी अन्य वन्यजीव के।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह
मामले को देखते हुए वन विभाग द्वारा ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। जंगल या सुनसान इलाकों में अकेले जाने से बचने, विशेषकर शाम और रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने तथा वन्यजीव दिखाई देने पर उसके करीब नहीं जाने की अपील की जा रही है।
ग्रामीणों से यह भी कहा जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध वन्यजीव दिखाई देता है तो वह तुरंत वन विभाग को सूचना दे और खुद उसका पीछा करने या उसे घेरने की कोशिश न करे।
जंगल के आसपास बढ़ी निगरानी
बाघ की संभावित मौजूदगी को देखते हुए क्षेत्र में वन अमले की सक्रियता बढ़ गई है। कैमरा ट्रैप के साथ-साथ मैदानी स्तर पर भी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी यह जानना महत्वपूर्ण है कि यदि क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी है, तो वह किस दिशा से आया है, किस क्षेत्र में उसकी आवाजाही है और क्या वह लगातार इसी इलाके में मौजूद है।
सबसे बड़ा सवाल—बाघ आखिर है कहां?
ग्रामीणों के दावों और क्षेत्र में मिले बताए जा रहे संकेतों के बीच फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में सिद्ध बाबा आश्रम के आसपास बाघ मौजूद है?
कैमरा ट्रैप लगाए जाने के बावजूद अभी तक स्पष्ट लोकेशन सामने नहीं आने से रहस्य बरकरार है। आने वाले दिनों में कैमरा ट्रैप से मिलने वाले फुटेज और वन विभाग की जांच से तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
फिलहाल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
जब तक बाघ की मौजूदगी को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, ग्रामीणों के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय वन विभाग की आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना और वन्यजीव से दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित रास्ता है।
बेलगहना में फिलहाल ‘बाघ’ की चर्चा ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन कैमरा ट्रैप की तस्वीर सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जंगल में वास्तव में बाघ की दस्तक हुई है या मामला किसी अन्य वन्यजीव से जुड़ा है।
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