Tuesday, October 27 2026
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भूख हड़ताल के 7 दिन, फिर भी गूंगा बना रहा सिस्टम: अरपा पार पृथक नगर निगम के लिए अमित तिवारी का अनशन खत्म, पर आंदोलन की आग बाकी

State Head - State_head_abhishek
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भूख हड़ताल के 7 दिन, फिर भी गूंगा बना रहा सिस्टम: अरपा पार पृथक नगर निगम के लिए अमित तिवारी का अनशन खत्म, पर आंदोलन की आग बाकी

भूख हड़ताल के 7 दिन, फिर भी गूंगा बना रहा सिस्टम: अरपा पार पृथक नगर निगम के लिए अमित तिवारी का अनशन खत्म, पर आंदोलन की आग बाकी

बिलासपुर।

एक तरफ बिलासपुर को न्यायधानी और स्मार्ट सिटी का तमगा दिया जाता है, तो दूसरी तरफ उसी शहर के बीच से बहने वाली अरपा नदी के पार बसी विशाल आबादी बुनियादी हकों और सुशासन के लिए कराह रही है। 'अरपा पार पृथक नगर निगम' की जायज मांग को लेकर नागरिक सुरक्षा मंच के संस्थापक अमित तिवारी पिछले सात दिनों से अन्न-जल त्यागकर आमरण अनशन पर बैठे थे। सात दिन तक एक नागरिक अपनी जान दांव पर लगाए रहा, लेकिन सत्ता के गलियारों और एयरकंडीशंड दफ्तरों में बैठे हुक्मरानों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। सोमवार को सातवें दिन कांग्रेस नेता अटल श्रीवास्तव ने अनशन स्थल पहुंचकर अमित तिवारी को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया, लेकिन इसके साथ ही प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जनआक्रोश और गहरा गया है।

सात दिन तक मौत से जंग, पर प्रशासनिक संवेदना शून्य

अरपा पार क्षेत्र की लाखों की आबादी लंबे समय से उपेक्षा का दंश झेल रही है। साफ-सफाई, सुचारू सड़कें, ड्रेनेज और त्वरित नागरिक सुविधाओं के अभाव ने इस इलाके को केवल वोट बैंक बनाकर छोड़ दिया है। इसी बदहाली के खिलाफ अमित तिवारी ने मोर्चा खोला था। हैरत की बात यह है कि 168 घंटे तक चले इस सत्याग्रह के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से कोई जिम्मेदार नुमाइंदा सुध लेने तक नहीं पहुंचा। न कोई ठोस आश्वासन, न कोई संवाद। यह खामोशी साफ बताती है कि आम जनता की बुनियादी तकलीफें सिस्टम की प्राथमिकताओं में कहीं दर्ज ही नहीं हैं।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर तीखे सवाल: चुनाव में वादे, आंदोलन में सन्नाटा?

अनशन समाप्त होने के दौरान क्षेत्रवासियों और मंच के कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश दिखा कि जिन जनप्रतिनिधियों को अरपा पार की जनता ने सिर-आंखों पर बिठाकर विधानसभा और स्थानीय निकायों तक पहुंचाया, वे इस पूरे संघर्ष के दौरान नदारद रहे।

 * आखिर क्यों जनता के बुनियादी ढांचे की मांग को लेकर एक नागरिक को सात दिन तक भूख से तड़पना पड़ा?

 * क्या जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सिर्फ चुनाव के समय हाथ जोड़ने तक सीमित है?

 * जब क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण का सवाल उठा, तो सत्ता और विपक्ष के स्थानीय दिग्गज खामोश क्यों रहे?

अनशन थमा है, हुंकार नहीं: लड़ाई अब सीधे सड़कों पर होगी

जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराने पहुंचे कांग्रेस नेता अटल श्रीवास्तव ने आंदोलनकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि अरपा पार के व्यवस्थित विकास और भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए पृथक नगर निगम का गठन बेहद जरूरी है। मंच के पदाधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अमित तिवारी का अनशन जरूर समाप्त हुआ है, लेकिन पृथक नगर निगम की मांग न तो दबी है और न ही खत्म हुई है।

इस अवसर पर अटल श्रीवास्तव के साथ आशीष सिंह, राजेश शुक्ला, देवेंद्र मिश्रा, रमेश सोनकर, मनोज शर्मा, जुहूर अली, ऋषि गौतम, राजेंद्र गौतम, अरविन्द शुक्ला, सिद्धार्थ तिवारी, विकास सिंह सहित नागरिक सुरक्षा मंच के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद थे। क्षेत्रवासियों का साफ कहना है कि अगर शासन ने जल्द ही अरपा पार के प्रशासनिक पुनर्गठन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो यह चिंगारी आने वाले दिनों में एक बड़े जनांदोलन का रूप लेगी।

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ 

हमर प्रदेश सी जी 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in Business.

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