✍️हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रतनपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित महामाई दाई मंदिर में गोंड समाज की पारंपरिक पूजा पद्धति बहाल करने तथा ग्राम उमरिया में समाज के मुक्तिधाम को सुरक्षित एवं चिन्हांकित करने की मांग को लेकर गोंड समाज सहित विभिन्न आदिवासी समाजों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रमेशचंद्र श्याम के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया।
समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, रतनपुर स्थित महामाई दाई आदिवंशीय गोंड समाज की कुलदेवी हैं। मंदिर में अन्य जनजातीय समाजों सहित सर्वसमाज के लोगों की भी गहरी आस्था है। बताया गया कि वर्ष 1970 के दशक तक मंदिर में गोंड समाज के बैगा द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा एवं सेवा-अर्जी की जाती थी। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने और मंदिर परिसर के विकास के दौरान पारंपरिक पूजा पद्धति में बदलाव हुआ तथा गोंड बैगा को पूजा व्यवस्था से हटा दिया गया।
समाज के लोगों का कहना है कि मंदिर प्रबंधन के लिए गठित ट्रस्ट में गोंड समाज का एक भी सदस्य शामिल नहीं है। इससे समाज के लोग स्वयं को उपेक्षित और आहत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि महामाई दाई मंदिर में गोंडी नेग-नियम, परंपराओं एवं निषेधों के अनुरूप गोंड पुजारियों के माध्यम से पूजा और सेवा-अर्जी की व्यवस्था जल्द बहाल की जाए। साथ ही मंदिर ट्रस्ट में गोंड समाज सहित अन्य समाजों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाए।
ग्राम उमरिया में मुक्तिधाम की भूमि सुरक्षित करने की मांग
ज्ञापन में बिल्हा ब्लॉक एवं तहसील के अंतर्गत ग्राम उमरिया में गोंड समाज के मुक्तिधाम का मुद्दा भी उठाया गया। समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, यहां गोंड समाज के लोग अपने मृत परिजनों का मिट्टी संस्कार करते आए हैं। उनका आरोप है कि मुक्तिधाम की भूमि पर अन्य लोगों द्वारा घर, कोठार और खेत बना लिए गए हैं, जबकि वहां समाज के पूर्वजों के दफन होने की बात कही जा रही है।
इस मामले में बिल्हा तहसीलदार और एसडीएम के समक्ष शिकायतें लंबे समय से लंबित होने की बात भी समाज के लोगों ने कही। उन्होंने प्रशासन से भूमि की जांच कराकर गोंड समाज के लिए मुक्तिधाम की भूमि चिन्हांकित करने तथा परंपरागत स्थल को सुरक्षित रखने की मांग की।
15 अक्टूबर को सेवा-अर्जी देने की घोषणा
समाज के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को अवगत कराया कि **15 अक्टूबर 2026 को गोंड समाज के वरिष्ठजन महामाई दाई मंदिर में स्वयं उपस्थित होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सेवा-अर्जी करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस धार्मिक परंपरा में अन्य समाज के बिचौलिया पुजारियों का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं होगा।
विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि रहे उपस्थित
इस अभियान में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रमेशचंद्र श्याम के साथ इन्द्रमण प्रसाद मरकाम, अध्यक्ष गोंडवाना गोंड महासभा खरौद राज; भागवत प्रसाद जगत, सलाहकार खरौद राज; डॉ. के.आर. जगत, संरक्षक खम्हारडीह चक एवं जिला अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ गोंडवाना गोंड महासभा इकाई बिलासपुर; समय सिंह गोंड, कार्यकारी जिला अध्यक्ष; छेदीलाल नेताम, जिला उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष खरौद राज; प्रेमसागर मरकाम, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य; शिव चरण जगत, कोषाध्यक्ष; घनश्याम खुशरो, सचिव सीपत उपकेंद्र; अनिल ध्रुव, प्रदेश संयोजक आदिवासी स्टूडेंट यूनियन; नंदलाल बिंझवार, जिला अध्यक्ष बिंझवार समाज; बद्री खैरवार, प्रदेश सचिव खैरवार समाज; तथा सुकालू मरकाम, सैनिक कंगला मांझी सरकार सहित समाज के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अलावा ग्राम रसेड़ा से फेकन सिंह मरावी एवं हरसिंह जगत, ग्राम आमाकोनी से हरसिंह जगत तथा ग्राम उमरिया-मुरकुटा चक से विनोद मरावी, देवलाल मरकाम, रामकला मरावी, संतोष मरकाम, नंदराम मरावी, फत्तु मरकाम, महेश मरावी, रामायण मरावी, राजकुमार मरावी, संतोष मरावी और अंतु नेताम सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि महामाई दाई मंदिर की पारंपरिक पूजा पद्धति, समाज की धार्मिक आस्था और ग्राम उमरिया के मुक्तिधाम से जुड़े मामलों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र उचित कार्रवाई की जाए।
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