हमर प्रदेश सीजी न्यूज़
स्टेट हेड मनोज कुमार भट्ट छत्तीसगढ़
मुआवजे की मांग को लेकर जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं किसान
जगदलपुर, १० अक्टूबर । बस्तर में बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब तबाही की तस्वीर सामने आ रही है। इंद्रावती नदी के किनारे बसे गांवों में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कहीं धान की फसल पानी में बह गई, तो कहीं खेतों में रेत जमा होने से अगली फसल की तैयारी करना मुश्किल हो गया है। बाढ़ से प्रभावित किसान अब मुआवजे की मांग को लेकर लगातार जगदलपुर कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं। भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से नुकसान का उचित आकलन कर किसानों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष नील कुमार बघेल के मुताबिक, डोंगाघाट, छेपड़ागुड़ा, बकावांड, गुड़ापुड़ा, तारापुर और बजावंड सहित इंद्रावती नदी के किनारे बसे इलाकों में किसानों को भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ के कारण धान की फसल प्रभावित हुई है और कई खेतों में रेत भर जाने से खेती करना चुनौती बन गया है। किसान संघ ने मांग की है कि फसल नुकसान के बदले प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान के समर्थन मूल्य के आधार पर 65,100 रुपये का मुआवजा दिया जाए। संघ का कहना है कि किसानों को हुए वास्तविक नुकसान को देखते हुए राहत राशि तय की जानी चाहिए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें।
बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए भारतीय किसान संघ ने कई मांगें रखी हैं। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड सहित अन्य कृषि ऋणों की माफी, क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पर्याप्त मुआवजा और बाढ़ में खराब हुए कृषि उपकरणों के नुकसान की भरपाई शामिल है। इसके अलावा, किसान संघ ने फसल बीमा की राशि सात दिनों के भीतर किसानों के खातों में जारी करने की मांग भी की है। किसानों का कहना है कि मौजूदा सहायता से उनके नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है। फसल बर्बाद होने के बाद उनके सामने परिवार के खर्च के साथ-साथ आगामी कृषि कार्यों के लिए पूंजी जुटाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
एक ओर किसान जल्द राहत देने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल के अनुसार, क्षतिग्रस्त मकानों के मुआवजे के लिए 25 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि फसल नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। कुछ तहसीलों से संबंधित प्रकरण ट्रेजरी में भेजे जा रहे हैं। प्रशासन को उम्मीद है कि एक से दो सप्ताह के भीतर किसानों को फसल क्षति की राशि मिलनी शुरू हो सकती है।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित गांवों में खेती-किसानी को दोबारा पटरी पर लाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। धान की फसल गंवा चुके किसानों को अब मुआवजे से उम्मीद है कि वे आर्थिक नुकसान से कुछ हद तक उबर सकेंगे। वहीं, जिन खेतों में रेत जमा हो गई है, उनके लिए अगली फसल की तैयारी भी आसान नहीं होगी।
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