✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
जगदलपुर। बस्तर संभाग में मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीजापुर जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी की ओर से मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन कर रही भव्या हेल्थ सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जारी नोटिस में निरीक्षण के दौरान सामने आई कई कमियों का उल्लेख किया गया है।
24 अगस्त 2026 को जारी नोटिस में कंपनी प्रबंधन से तीन दिनों के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि कमियों को दूर नहीं किए जाने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।
आउटर लैब टेस्ट करीब एक प्रतिशत, संख्या बढ़ाने के निर्देश
नोटिस के अनुसार मोबाइल मेडिकल यूनिट में आउटर लैब टेस्ट की संख्या बेहद कम पाई गई। कुल लैब टेस्ट में लगभग एक प्रतिशत ही आउटर लैब टेस्ट किए जा रहे हैं। ऐसे में योजना के तहत मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही जांच सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नोटिस में आउटर लैब टेस्ट की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरीजों को आवश्यकता के अनुसार जांच सुविधा उपलब्ध हो सके।
एक्सपायर दवाएं मिलने से बढ़ी चिंता
निरीक्षण के दौरान मोबाइल मेडिकल यूनिट में एक्सपायर दवाएं पाए जाने का भी उल्लेख नोटिस में किया गया है। कंपनी प्रबंधन को दवाओं के स्टॉक को लेकर विशेष निर्देश दिए गए हैं और एक्सपायर दवाओं की संख्या शून्य रखने को कहा गया है।
स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी मोबाइल यूनिट में एक्सपायर दवाओं की मौजूदगी से दवा स्टॉक, नियमित जांच और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
प्रिंटर खराब, मरीजों को नहीं मिल रही ओपीडी पर्ची
बीजापुर की मोबाइल मेडिकल यूनिट में प्रिंटर खराब होने के कारण मरीजों को ओपीडी पर्ची उपलब्ध नहीं होने की बात भी नोटिस में दर्ज है। इसके अलावा यूनिट में लगा टीवी खराब होने से प्रचार-प्रसार से संबंधित सामग्री भी प्रसारित नहीं हो पा रही है।
जिस मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से जरूरतमंद और गरीब आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का उद्देश्य है, वहां बुनियादी तकनीकी सुविधाओं के खराब होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बस्तर में डॉक्टरों की कमी का भी मुद्दा
बीजापुर में सामने आई इन कमियों के बीच संभाग मुख्यालय जगदलपुर में भी मोबाइल मेडिकल यूनिट की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ मोबाइल मेडिकल यूनिट में नियमित चिकित्सकों की कमी है और डॉक्टरों की अनुपलब्धता का असर यूनिटों के संचालन पर पड़ रहा है।
ऑडिट में कमियां, फिर भी सुधार पर सवाल
मोबाइल मेडिकल यूनिट की मासिक TPA ऑडिट रिपोर्ट में भी समय-समय पर विभिन्न कमियां सामने आने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं होने के आरोप लग रहे हैं।
बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों में डॉक्टरों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं के उपयोग, दवाओं के स्टॉक, तकनीकी संसाधनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं मरीजों की संख्या में गिरावट और लोगों के योजना से दूर होने की बात भी चिंता का विषय बन रही है।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
बीजापुर जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी के नोटिस के बाद अब योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि केवल निरीक्षण के दौरान कमियां दर्ज करने के बजाय उनके सुधार की जमीनी स्थिति की भी नियमित निगरानी की जाए, ताकि हितग्राहियों को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।
इस मामले में कंपनी प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कंपनी प्रबंधन की ओर से फोन रिसीव नहीं किया गया। कंपनी का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।
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