रायगढ़ में इनकम टैक्स का बदला मिजाज: जब अफसरों ने होटल में बैठकर सुलझाईं व्यापारियों की उलझनें
अक्सर टैक्स और नोटिस के नाम से दूरी बनाने वाले व्यापारी और आयकर अधिकारी बुधवार को रायगढ़ के होटल अंश में एक ही टेबल पर आमने-सामने नजर आए। मौका था कैट छत्तीसगढ़ और आयकर विभाग की संयुक्त पहल पर आयोजित ‘व्यापारी कर संवाद’ का, जो ‘एक प्रदेश, एक दिन, एक संवाद’ अभियान के तहत संपन्न हुआ।
नोटिस का डर नहीं, सीधा समाधान
पारंपरिक सरकारी कार्यप्रणाली से हटकर आयकर विभाग के अधिकारी खुद दफ्तर से बाहर निकलकर कारोबारियों के बीच पहुंचे। मंच से औपचारिकता निभाने के बजाय पूरा जोर व्यापारियों की रोजमर्रा की व्यावहारिक परेशानियों को खत्म करने पर रहा।
सत्र के दौरान कारोबारियों ने बिना किसी झिझक के वे मुद्दे उठाए जो उन्हें अक्सर परेशान करते हैं:
* टीडीएस और टीसीएस कटौती के उलझे नियम
* रिटर्न फाइलिंग के दौरान आने वाली तकनीकी अड़चनें
* फेसलेस और डिजिटल सिस्टम से मिलने वाले ऑनलाइन नोटिस
अधिकारियों ने तकनीकी पेचीदगियों को छोड़कर सरल भाषा में स्पष्ट किया कि नोटिस कोई सजा नहीं, बल्कि सिर्फ स्पष्टीकरण का जरिया है। इसके साथ ही नई कर व्यवस्था और धारा 87ए के तहत मिलने वाली छूट के फायदे भी समझाए गए।

अधिकारियों का संदेश: भ्रांतियों से बचें, अधिकृत जानकारी लें
आयकर अधिकारी अनिल बोकाड़े, देवनारायण नायक और एन स्मिता ने कारोबारियों को भरोसा दिलाया कि पारदर्शी व्यवस्था में डर की कोई जगह नहीं है। उन्होंने व्यापारियों से समय पर रिटर्न दाखिल करने और किसी भी अफवाह या असमंजस की स्थिति में केवल अधिकृत माध्यमों से ही जानकारी लेने की अपील की।
कैट की पहल से बढ़ा भरोसा
कैट (CAIT) के संरक्षक संतोष अग्रवाल, अध्यक्ष किशोर तलरेजा, रामनिवास मोड़ा, आनंद बेरीवाल और सीए एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कारोबारियों ने माना कि इस तरह के सीधे संवाद से विभाग को लेकर बनी हिचक खत्म होती है। कार्यक्रम का संचालन कमलेश मोटवानी और मनीष उदासी ने किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सीए, खुदरा कारोबारी और प्रमुख व्यापारिक प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को विभाग और करदाताओं के बीच का नया सेतु बताया।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी

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