✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज दुर्ग ब्यूरो चीफ रिपोर्टर कलावती
गरियाबंद/फिंगेश्वर। गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर क्षेत्र के देवरी गांव में ऋषि पंचमी के अवसर पर वर्षों पुरानी अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां ग्रामीण सांपों से डरने के बजाय उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और सांपों की शोभायात्रा भी निकाली जाती है। इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग देवरी गांव पहुंचते हैं।
देवरी गांव में सांवरा समिति के सदस्य घरों और आसपास के क्षेत्रों में निकलने वाले सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ते हैं। इसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित स्थान, विशेषकर जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया जाता है।
ग्रामीणों का मानना है कि सांपों के प्रति आस्था और संरक्षण की भावना के कारण गांव में इनके साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की परंपरा बनी हुई है। हालांकि, सांपों के संबंध में सुरक्षा और विशेषज्ञ सावधानी बेहद जरूरी मानी जाती है।
सांप पकड़ने और संरक्षण की दी जाती है शिक्षा
देवरी गांव में सांवरा गुरु पाठशाला भी संचालित होने की जानकारी सामने आई है, जहां सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उनके संरक्षण के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाता है।
सांवरा समिति के प्रमुख कमलेश गुरु के मुताबिक, वे पिछले कई वर्षों से लोगों को सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने और उन्हें बचाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके अनुसार अब तक 500 से अधिक सांपों को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा चुका है।
आस्था के साथ संरक्षण का संदेश
ऋषि पंचमी के अवसर पर आयोजित यह सांपों की शोभायात्रा देवरी गांव की अनोखी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन चुकी है। आयोजन में जहां लोगों की धार्मिक आस्था दिखाई देती है, वहीं सांपों के संरक्षण और उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए प्राकृतिक आवास में छोड़ने का संदेश भी सामने आता है।
विशेषज्ञों की सलाह: सांप चाहे जहरीला हो या गैर-जहरीला, उसे स्वयं पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए। सांप दिखाई देने पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग की मदद लेना ही सुरक्षित तरीका है।
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