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सुपोषण अभियान से बदली तस्वीर, जिले में कुपोषण की दर आधी से भी कम

hetram@hamarpradeshcg
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Chhattishgarh local news
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✍️हेतराम साहू स्टेट- रिपोर्टर

हमर प्रदेश छत्तीसगढ़

 

सुपोषण अभियान से बदली तस्वीर, जिले में कुपोषण की दर आधी से भी कम

 

33.2 प्रतिशत से घटकर 16.32 प्रतिशत हुआ कुपोषण, आरती और पुलकित जैसे हजारों बच्चों ने पाई सुपोषण की राह

 

महासमुंद, 28 सितंबर 2026। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण को लेकर संचालित योजनाओं, नियमित निगरानी और आंगनबाड़ी स्तर पर सतत प्रयासों का असर महासमुंद जिले में दिखाई दे रहा है। जिले में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण की दर वर्ष 2014-15 के 33.2 प्रतिशत से घटकर वर्तमान में 16.32 प्रतिशत रह गई है। यानी कुपोषण की दर आधी से भी कम हुई है। पोषण देखभाल, उपचार, अतिरिक्त पोषण आहार और परिवार की सहभागिता से आरती और पुलकित जैसे हजारों बच्चों ने कुपोषण को मात देकर सुपोषण की राह पकड़ी है।

 

गंभीर कुपोषण से सामान्य श्रेणी तक पहुंची आरती

 

बागबाहरा विकासखंड की तीन वर्षीय आरती जब पहली बार आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची, तब उसका वजन उम्र के अनुपात में काफी कम था। नियमित नाप-जोख और पोषण स्तर की जांच के दौरान उसे गंभीर कुपोषित श्रेणी में चिन्हित किया गया। आरती बार-बार बीमार पड़ती थी और सुस्ती के साथ उसकी पोषण स्थिति भी चिंताजनक थी।

 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरती को तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां 14 दिनों तक चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार किया गया। उसे आवश्यक दवाइयों के साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया। उपचार के बाद भी उसकी पोषण स्थिति पर लगातार नजर रखी गई।

 

अतिरिक्त पोषण आहार से मिली ताकत

 

पोषण पुनर्वास केंद्र से छुट्टी के बाद आरती को आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से नियमित गरम भोजन और अतिरिक्त पोषण आहार दिया गया। उसके आहार में अंडा, मूंगफली-गुड़ की चिक्की और रेडी-टू-ईट जैसे पोषक खाद्य पदार्थ शामिल किए गए। इससे उसे आवश्यक ऊर्जा और पोषक तत्व मिलते रहे।

 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन ने नियमित रूप से आरती के घर पहुंचकर उसकी स्थिति की जानकारी ली। परिवार को स्वच्छता, संतुलित आहार और बच्चों की उचित देखभाल के बारे में समझाया गया। घर में उपलब्ध हरी सब्जियों, दालों और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों से भोजन तैयार करने की जानकारी भी दी गई।

 

लगातार छह महीने तक उपचार, अतिरिक्त पोषण आहार, निगरानी और परिवार की सहभागिता का परिणाम यह रहा कि आरती का वजन धीरे-धीरे बढ़ा और वह गंभीर कुपोषित श्रेणी से निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच गई। आज वह स्वस्थ, सक्रिय और हंसमुख बच्ची है।

 

पुलकित ने भी कुपोषण को दी मात

 

नयापारा खुर्द के पुलकित रात्रे की मां भारती रात्रे बताती हैं कि जन्म से ही उनका पुत्र गंभीर कुपोषित श्रेणी में था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने गृहभेंट के दौरान मां को स्तनपान के सही तरीके और उसके महत्व की जानकारी दी।

 

पुलकित के छह माह पूरे होने के बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार शुरू कराया गया। उसे आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाला रेडी-टू-ईट और पौष्टिक दलिया भी दिया गया। मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के अंतर्गत उसका स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। नियमित देखभाल और पोषण आहार से पुलकित के वजन में लगातार सुधार हुआ और अब वह कुपोषण से बाहर निकलकर सामान्य पोषण श्रेणी में पहुंच गया है।

 

सतत निगरानी और सामुदायिक सहभागिता बनी बदलाव की कुंजी

 

महासमुंद जिले में कुपोषण में आई कमी के पीछे बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, वजन एवं ऊंचाई की निगरानी, पोषण पुनर्वास केंद्र की सेवाएं, आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाला पोषण आहार, गृहभेंट और परिवारों को पोषण संबंधी परामर्श जैसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

आरती और पुलकित की कहानी बताती है कि समय पर कुपोषण की पहचान, सही उपचार, पौष्टिक आहार और लगातार निगरानी से बच्चों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यही प्रयास जिले के हजारों बच्चों को स्वस्थ और सुपोषित भविष्य की ओर ले जा रहे हैं।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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