✒️अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़
सेवा समाप्ति की जगह सिर्फ तबादला! कोटखर्रा के रोजगार सहायक पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्राम पंचायत कोटखर्रा के रोजगार सहायक के मामले में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सहायक के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं और लापरवाही की शिकायतें सामने आने के बाद भी कठोर कार्रवाई करने के बजाय महज तबादला कर मामले को निपटा दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार रोजगार सहायक के खिलाफ मनरेगा कार्यों में लापरवाही, हितग्राहियों से कथित अवैध वसूली और पंचायत के कामकाज में अनियमितता को लेकर लगातार शिकायतें की गई थीं। शिकायतों के बाद मामले की जांच भी कराई गई। ग्रामीणों का दावा है कि जांच में आरोप सही पाए जाने के बावजूद रोजगार सहायक की सेवा समाप्त करने के बजाय उसे दूसरी ग्राम पंचायत में स्थानांतरित कर दिया गया।
एक पंचायत से दूसरी पंचायत भेजना ही क्या कार्रवाई है?
प्रशासन के इस फैसले से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि किसी कर्मचारी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो केवल तबादला कर देने से व्यवस्था में सुधार कैसे होगा?
ग्रामीणों का कहना है कि जिस कर्मचारी पर एक पंचायत में अनियमितताओं के आरोप लगे हों, उसे दूसरी पंचायत में भेज देना समस्या का समाधान नहीं है। इससे न केवल शिकायतकर्ताओं में निराशा पैदा होती है, बल्कि पंचायत स्तर पर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के बीच भी गलत संदेश जा सकता है।
जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों की जांच के बाद भी जिम्मेदारी तय करने के बजाय तबादले की कार्रवाई की गई। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित हुई थीं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों ने मामले में प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग की है और कहा है कि केवल तबादले को कार्रवाई मानकर मामले को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों, जांच रिपोर्ट और रोजगार सहायक के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाए और यदि आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायतों में मनरेगा और विकास कार्यों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में सिर्फ तबादले के बजाय दोष तय होने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।
अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।
Hamar pradesh CG
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